युवा बोले, प्रदेश में भी लगे गुटखा पर प्रतिबंध

Varanasi Updated Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गुटखा की बिक्री पर कई प्रदेशों की सरकार प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। बिहार सरकार ने तो इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे पहले भी कई प्रदेशों की सरकार ने भी इसकी बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया। सूबे की सरकार भी गुटखा की बिक्री को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रही है। गुटखा की बिक्री पर प्रतिबंध कहां तक जायज है, क्या प्रदेश सरकार की ओर से इस पर प्रतिबंध लगाना उचित है, इस पर शहर के युवाओं से अमर उजाला ने रायशुमारी की। गुटखा पर प्रतिबंध के पक्ष में कुछ ऐसे युवा थे, जो स्वयं गुटखा का सेवन करते हैं।

गुटखा पर प्रतिबंध सराहनीय कदम है। जब लोगों को मिलेगा ही नहीं तो वे खाएंगे कहां से। प्रदेश सरकार जितना जल्द प्रतिबंध लगा दे, उतना ही अच्छा है - मनीष यादव, चेतगंज
गुटखा पर रोक का फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था। यदि पहले ऐसा निर्णय किया गया होता तो बहुत सारे घर बर्बाद होने से बच गए होते। गुटखा रूपी धीमे जहर ने कई जिंदगियां असमय खत्म कर दीं है। अखिलेश सरकार को मेरी ओर से बधाई - विनय गुजराती, बैजनत्था
वर्षों से गुटखा खाने की लत है। कई बार 15-15 दिनों तक इसका त्याग किया लेकिन फिर खाने लगा। मैं चाह कर भी इसे छोड़ नहीं पा रहा हूं। अच्छा होगा कि गुटखा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लग जाए। न यह मिलेगा और न मै खाऊंगा - विमल विश्वकर्मा, सुंदरपुर
मैं तो शुरू से ही गुटखा का विरोधी हूं। मेरी मित्र मंडली में भी कई लड़के हैं जो गुटखा खाते हैं। उनके हाथ में जब भी गुटखा देखता हूं तो उसे छीन कर फेंक देता हूं। कई बार तो मेरी उनसे लड़ाई भी हो जाती है लेकिन मैं नहीं मानता- उमेश प्रजापति, भोजूबीर
मैं भी गुटखा खा-खा कर बर्बाद हूं। यह जानते हुए भी इसे खाने से बीमारी होगी लेकिन तलब लगती है तो बिना खाए किसी काम में मन ही नहीं लगता। जब मिलना ही बंद हो जाएगा तो एक गंदी आदत छूट जाएगी - विकास राव, बांसफाटक
सिर्फ गुटखा पर प्रतिबंध लगाने से ही काम नहीं चलेगा। सरकार को चाहिए कि शराब भी प्रतिबंधित करे। शराब की कमाई को सरकार जनकल्याण की योजनाओं में लगाना बंद करे। गंदे धन से किया जाने वाला अच्छा काम कभी सफल नहीं होता - प्रशांत पांडेय दशाश्वमेध
गुटखा पर प्रतिबंध बहुत अच्छा है। इस कदम के लिए प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री बधाई के पात्र हैं। उन्होंने युवाओं की भलाई की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लेकर सबके लिए उदाहरण पेश किया है। प्रतिबंध आज से ही लागू होना चाहिए - विभांशु यादव, नदेसर
गुटखा नई पीढ़ी के लिए हेरोइन जैसे नशे से भी खतरनाक होता जा रहा है। सड़कों-गलियों में छोटे-छोटे बच्चों को गुटखा खाते देखती हूं तो बहुत कष्ट होता है। उन्हें रोकने का प्रयास किया तो उल्टा-सीधा बोलने लगे। जब मिलेगा ही नहीं खाएंगे कैसे - नीतू पांडेय, सामने घाट

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