मत पीजिए एनर्जी ड्रिंक, सुनिए राग वृंदावनी

Varanasi Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। क्या आप दैनिक कामकाज के दौरान थकान महसूस करने पर एनर्जी ड्रिंक पीते हैं ? अगर हां तो अब आप को ऐसा करने की जरूरत नहीं है। एनर्जी ड्रिंक पीने की बजाय राग वृंदावनी सुनिए। इस राग में तत्काल ताजगी और ऊर्जा देने की क्षमता है। यह तो महज एक उदाहरण है। उत्तर भारतीय और कर्नाटकी संगीत के शास्त्रीय रागों में असाध्य रोगों को दूर करने की अद्वितीय क्षमता है। कौन-कौन से राग किस-किस रोग पर कारगर होते हैं। इस विषय पर शोध कर रहे ऋषिकेश के स्वामी गगनानंद उर्फ बंसी बाबा इस कार्य को पूर्णता प्रदान करने के लिए इन दिनों काशी में हैं। उन्हें विश्वास है कि अगले कुछ माह में वह पूरे देश के सामने रोगों पर कारगर रागों की सूची प्रस्तुत करने में सफल होंगे।
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गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय से योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत नाद चिकित्सा पाठ्यक्रम पर हो रहे शोध कार्य पर चरचा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीय और कर्नाटकी दोनों रागों के साथ समय की बाध्यता है। इसका एकमात्र कारण यह है कि संगीत प्राणी के स्वास्थ्य गंभीरता से जुड़ा है। तभी तो स्वस्थ रहने के लिए समयबद्धता पर बल दिया गया है। यही वजह है कि उठ कर कुछ करने के लिए तैयार होने का भाव भरने वाले राग भैरवी का प्रावधान सुबह किया गया। दिनभर की थकान दूर कर देने के गुण वाले राग यमन को सायंकाल के लिए निर्देशित किया गया है। हिंडोला और मालकौंस जैसे राग रात्रि के लिए बनाए गए, जो विश्राम की अनुभूति में प्राणी को ले जाते हैं। आंध्र प्रदेश के कुचिपुड़ी गांव के निकट ब्राह्मण परिवार में जन्मे और ऋषिकेश में रह कर गगनानंद मिशन के माध्यम से आयुर्नाद के प्रचार-प्रसार में लगे स्वामी गगनानंद कहते हैं सिर्फ बीट के बल पर अमेरिका म्यूजिक थेरिपी एसोसिएशन दुनिया का सबसे बड़ा म्यूजिक थेरेपी एसोसिएशन है। एक साल के डिप्लोमा कोर्स के लिए 50 लाख रुपये फीस है। फिर भारत के संगीत में भाव भी हैं और राग और ताल भी। इसका उपयोग भारत के अस्पतालों में किया जाए तो दवा पर खर्च होने वाला भारी बजट बचाया जा सकता है।
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