अबकी अमीरों को सस्ता गेहूं नहीं देंगे कोटेदार

Varanasi Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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सेवापुरी। गरीबी रेखा के ऊपर जीवन यापन करने वालों को अगस्त माह से राशन की दुकानों से गेहूं नहीं मिलेगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग शहरी क्षेत्रों में गेहूं की आपूर्ति जरूर करेगा, लेकिन ग्रामीण इलाकों के खाद्यान्न का उठान इस महीने नहीं किया जा रहा है। यह स्थिति गाजीपुर को छोड़कर मंडल के सभी जिलों की है। इसे भारतीय खाद्य निगम के गोदाम पर केंद्रीय जांच ब्यूरो के छापे से जोड़कर देखा जा रहा है।
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गाजीपुर को छोड़कर अन्य किसी जिले का आपूर्ति विभाग गरीबी रेखा के ऊपर के कोटे का अनाज नहीं ले रहा है। अनाज के लिए 16 से 22 जुलाई तक कोटेदार बैंक में रुपये जमा कर देते हैं। इस बार सबको रकम जमा करने से मना कर दिया गया है। सप्लाई इंस्पेक्टर रामजियावन यादव ने बताया कि भारी उपज को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में खाद्यान्न की आपूर्ति रोकी गई है। यह स्थिति तब है जब खरीद अधिक होने के कारण गेहूं को भीगने से बचाने के लिए प्रदेश शासन ने पूर्वांचल के जिलों में दो-दो महीने का गेहू्ं वितरित करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चावल की जगह गेहूं की आपूर्ति करने को कहा था। अपर जिला मजिस्ट्रेट नागरिक आपूर्ति एसके मौर्य ने बताया कि शहरी क्षेत्र में गेहूं का वितरण होगा, लेकिन ज्यादातर जिलों ने ग्रामीण इलाकों का गेहूं सरेंडर कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में किसानों के पास खाद्यान्न भरा हुआ है। ऐसे में वे कोटे की दुकानों से खरीदारी नहीं करेंगे। ऐसे में दुरुपयोग होने की आशंका है। इसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
बता दें कि पिछले दिनों एफसीआई के मंडुवाडीह स्थित गोदाम में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने छापामारी की थी। वह खाद्यान्न की आवक और उठान की जांच कर रही है। इस गोदाम में बनारस और गाजीपुर का खाद्यान्न भंडारण किया जाता है। ब्यूरो के अधिकारियों को छह में से महज दो यूनिट की जांच में 67 सौ बोरे खाद्यान्न की हेराफेरी का पता चला है। ऐसे में अधिकारी गोदाम से अनाज उठाने से बचना चाहते हैं। एपीएल कोटे का गेहूं छह रुपये 60 पैसे की दर से मिलता है। लोगों के नहीं लेने पर कोटेदार उन्हें खुले बाजार में बेच देते हैं। सीबीआई जांच में यह मामला सामने आने पर अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। अफसर ऐसी अप्रिय स्थितियों से भरसक बचना चाहते हैं।
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