रागों-बंदिशों ने दी सावनी फुहारों को लय

Varanasi Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सावनी फुहारों को रागों, बंदिशों से रविवार की रात नई ताकत मिली। ठुमरी-कजरी के बोल पर काली घटाएं घिरीं और झूम कर बरसी भीं। पद्मभूषण गिरजा देवी की शिष्या मिताली सेन गुप्ता ने गायन की साधना से बनारस घराने के संगीत रसिकों को तृप्त करने की कोशिश की। शहर के मध्य एक होटल में महफिल देर रात तक चली।
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दीप प्रज्जवलन के बाद राग खमाज में ठुमरी से उन्होंने शुरुआत की। बंदिश के बोल थे-आवत हुई है...। इसके बाद राग काफी में दूसरी ठुमरी से वातावरण को उन्होंने नई ऊंचाई दी। बोल थे-पिया तो मानत नाहीं...। राग किरवानी में दादरा-तुम सांची कहो.. की प्रस्तुति जब उन्होंने की तो लोग झूम उठे। राग दीपचंदी ताल के बाद राग तिलक कामोद में झूला पेश किया। बंदिश थी-झुलाए बनवारी...। इसके बाद उन्होंने कहरवा ताल में कजरी -घिर आई है बदरिया...सुनाकर वाहवाही लूटी। भगवान शिव के भजन से समापन हुआ। हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्र, तबले पर किशोर मिश्र, सारंगी पर संतोष मिश्र ने संगत की। संचालन बृज गोपाल अग्रवाल ने किया। स्वागत सरला लाखोटिया और आईसीसीआर के क्षेत्रीय अधिकारी अनुराग सिंह ने माल्यार्पण किया। संयोजन कर रहे कला प्रकाश के अध्यक्ष अशोक कपूर ने अतिथियों के प्रति आभार प्रकाश किया।
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