जानलेवा भवनों में जिंदगियों के दफन होने का इंतजार

Varanasi Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। बारिश से चौबीस घंटे के दौरान दो भवनों के धराशायी होने के बाद भोले की प्राचीन नगरी में जर्जर इमारतों को लेकर लोगों की नींद उड़ गई है। शनिवार को एक तरफ ढहे भवनों का मलबा हटाने की मशक्कत शुरू हुई तो दूसरी ओर ऐसे भवनों में रहने वालों के अलावा आसपास के घरों के लोग भी दहशत में रहे। काशी विश्वनाथ मंदिर के गेट नंबर दो -सरस्वती फाटक जाने वाली यलो जोन की गली में पांच हजार से अधिक तीर्थयात्रियों पर जर्जर भवनों की दीवारें कब यमराज बनकर टूट पड़ें कहा नहीं जा सकता। गली के दोनों बाजू की जर्जर इमारतों को खतरनाक घोषित करने के बाद भी नगर निगम प्रशासन उन्हें गिराने को लेकर संजीदा नहीं है। माना जा रहा है कि सावन में अगर हादसा हुआ तो वहां बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि हो सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सरकार को जवाब देते नहीं बनेगा।
सरस्वती फाटक से काशी विश्वनाथ जाने वाली लाहोरी टोला गली के चौराहे पर राधाकृष्ण मंदिर की इमारत करीब ढाई फीट तक ऊपर से लटक गई है। इससे चार फीट चौड़ी गली के दोनों बाजू के भवनों के बारजे आपस में सटने के कगार पर हैं। सेवइत श्यामलता चौबे और उनके भाई के परिजन उसी भवन में रहते भी हैं। पास में ही मौजूद खत्री बंधुओं की चार मंजिला इमारत सीके 34/27 का पिछला हिस्सा आठ महीने पहले ढहने से उस मोहल्ले की गली मलबे से बंद है। आगे के हिस्से की दीवार फटकर गली की ओर लटक रही है। इस भवन को गिराने के लिए बांके बिहारी खन्ना के अलावा राजेंद्र पाठक, केशव प्रसाद अग्रवाल, बसंत लाल सेठ और शीतला प्रसाद गोस्वामी नगर आयुक्त को पत्र दे चुके हैं। फिर भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया। मणिकर्णिका घाट के चलते दुनिया भर के पर्यटकों से तो गली भरी ही रहती है। आसपास दर्जन भर से अधिक अतिथिगृहों, धर्मशालाओं में भी पर्यटक उसी रास्ते से जाते हैं। स्कूल, वृद्धाश्रम के अलावा सस्ते गल्ले की दुकान का भी दबाव उसी गली पर होने की वजह से जर्जर इमारतें मौत का साया बन मंडरा रही हैं। आसपास के भवन स्वामी तो इस बात से चिंतित हैं कि जर्जर बहुमंजिली इमारतें बारिस से छीज कर गिरीं तो उनके भवन भी ढह जाएंगे।
प्वाइंटर
05 हजार पर्यटकों-श्रद्धालुओं की रह गुजर खौफ के साए में
07 लक्जरी गेस्ट हाउस को जोड़ती है लाहोरी टोला की गली
06 धर्म्रशालाओं में दिन रात भरे रहते हैं तीर्थयात्री
02 विधवाश्रम भी हैं उसी रास्ते पर
06 स्कूलों का भी आम रास्ता होने से चिंतित हैं लोग

कोट
मेरे घर की खिड़कियां, बारजे खत्री बंधुओं के जर्जन भवन के चलते क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। मोहल्ले के लोग किसी भी वक्त होने वाली अनहोनी की आशंका से रात भर जाग कर बिता रहे हैं। नगर आयुक्त के अलावा सिटी मजिस्ट्रेट को भी हालात की जानकारी दी गई लेकिन हुआ कुछ नहीं-बांके बिहारी खन्ना, जर्जर भवन के पड़ोसी

ललिता घाट से लाहौरी टोला के बीच अधिकतर भवन जर्जर होने के चलते गिरने के कगार पर पहुंच गए हैं। बार-बार बताने के बाद भी नगर निगम सुधि नहीं ले रहा है। गली से गुजरने वाले तीर्थयात्रियों को सबसे अधिक खतरा है-राज कुमार कपूर, लाहौरी टोला

हम लोग रातभर जागते रहते हैं। गली में मेरे घर के सामने के भवन की दीवार फटकर लटक गई है। किसी भी समय वह भवन गिरा तो उसके घर की दीवारें, छतें ढह जाएंगी। मेरे पास इतना भी सामर्थ्य नहीं है कि घर गिर गया तो दोबारा मरम्मत भी कराई जा सके -पवन गोस्वामी, लाहौरी टोला
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