25 फीसदी विद्यार्थी परीक्षा से वंचित रह गए

Varanasi Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। भारी अव्यवस्था के बीच शुक्रवार को बनारस और चंदौली जिलों के चार आईटीआई संस्थानों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा संपन्न तो हो गई, लेकिन प्रवेश पत्र न मिलने के कारण 25 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा से वंचित रह गए। बारह सौ सीटों के लिए जिले के 32 केंद्रों पर आयोजित परीक्षा में कुल 21 हजार 368 अभ्यर्थियों को बैठना था, लेकिन तमाम प्रयास के बाद भी 5250 अभ्यर्थी प्रवेश पत्र नहीं पा सके। हालांकि नोडल अधिकारी ने किसी भी पहचान पत्र के साथ परीक्षा में बैठने की इजाजत दे दी थी लेकिन इसका भी फायदा नहीं मिला, क्योंकि यह घोषणा तब की गई जब विद्यार्थी केंद्रों पर पहुंचे।
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बता दें कि गुरुवार को तमाम जद्दोजहद के बाद भी हजारों अभ्यर्थियों को प्रवेशपत्र नहीं मिल सके थे। जिन्हें मिले भी उनमें त्रुटियों की भरमार थी। किसी का अनुक्रमांक गलत था तो किसी का नाम। किसी अभ्यर्थी के प्रवेश पत्र में दूसरे की फोटो लगी थी। इससे गुस्साए छात्रों ने करौंदी स्थित आईटीआई कालेज परिसर में जमकर हंगामा मचाया और तोड़फोड़ भी की थी। गुरुवार की देर रात तक शहर के साइबर कैफे में प्रवेश पत्र डाउनलोड कराने के लिए विद्यार्थियों की भीड़ लगी रही, लेकिन सरवर डाउन होने से अधिकांश को निराश लौटना पड़ा। आईटीआई संस्थानों ने 60 प्रतिशत अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र बांटने का दावा किया था, लेकिन शेष 40 प्रतिशत इंटरनेट के भरोसे रह गए। इनमें भी मात्र 15 प्रतिशत अभ्यर्थी ही प्रवेश पत्र डाउनलोड करा सके। यही हाल शुक्रवार की सुबह भी दिखा। लंका, सिगरा, रथयात्रा, कैंट समेत विभिन्न स्थानों पर साइबर कैफे पर भीड़ लगी रही, जबकि कुछ विद्यार्थी करौंदी स्थित आईटीआई भी पहुंच गए। वहां प्रवेश पत्र के लिए छात्रों ने हंगामा भी मचाया, मगर उन्हें समझाकर वापस भेज दिया गया।
इधर, शुक्रवार को महामना मदन मोहन मालवीय इंटर कालेज संकट मोचन, डीएवी इंटर कालेज, स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल गढ़वाघाट समेत 32 केंद्राें पर सुबह साढ़े नौ बजे परीक्षा शुरू हुई। महामना इंटर कालेज, संकटमोचन में परीक्षा देने आए चहनिया के सतीश कुमार का कहना था कि गुरुवार की रात ढाई बजे सिगरा स्थित एक इंटरनेट सेंटर से प्रवेश पत्र डाउनलोड कराने के बाद परीक्षा दे पाया, जबकि उसी के गांव के राकेश और मनोज सरवर डाउन होने से प्रवेश पत्र नहीं पा सके और परीक्षा से वंचित रह गए। चौकाघाट निवासी रीना का कहना था कि ऐसी फजीहत पहले कभी नहीं झेलनी पड़ी थी। मेरा सेंटर स्वामी हरसेवानंद पब्लिक स्कूल में था, लेकिन प्रवेश पत्र लेने के लिए मुझे और मेरे परिजनाें को बेहद परेशानी झेलनी पड़ी।
कोट
प्रवेश पत्र वितरित करने के लिए कम समय मिलने से ऐसी समस्या उत्पन्न हुई फिर भी अधिकांश छात्राें को एडमिट कार्ड उपलब्ध करा दिया गया था-बीके प्रसाद, नोडल अधिकारी
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