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समिति ही पूरी नहीं तो कौन तय करेगा काम

Varanasi

Updated Fri, 13 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। जिले के विकास की योजना को 31 जुलाई तक अंतिम रूप देना है। यह काम नियत समय पर पूरा होने के आसार बिल्कुल ही नहंीं हैं। कारण जिला योजना समिति ही पूर्ण नहीं हैं। इसके 40 में से 14 पद रिक्त हैं। सबसे अहम यह कि न जिला पंचायत अध्यक्ष हैं न निकाय अस्तित्व में है। ऐसे में तो निकायों के कार्यों को प्रस्तावित कौन करेगा।
वित्त वर्ष 2011-12 में जिला योजना में प्रस्तावित कार्यों के लिए 126.47 करोड़ रुपये परिव्यय स्वीकृत किया गया था। अब 2012-13 की जिला योजना में प्रस्तावित विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाने के लिए 155.62 करोड़ रुपये का परिव्यय तय किया गया है। प्रस्तावित विकास कार्यों को 40 सदस्यीय समिति अंतिम रूप देतीने के लिए
यहां 40 सदस्यीय जिला योजना समिति बनी है। इसमें नगर निगम के 9, नगर पालिका परिषद रामनगर के 3 व नगर पंचायत गंगापुर के एक सदस्य की सीट रिक्त चल रही है। निकायों के अलावा समिति में जिला पंचायत के 19 सदस्य शामिल हैं। पांच सदस्य शासन द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। तीन अन्य सदस्यों के रूप में प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी तथा जिला पंचायत अध्यक्ष समिति में शामिल होते हैं। उधर, निकायों के अलावा जिला पंचायत अध्यक्ष नहीं होने से एक सीट और खाली है। कुल मिला कर अभी जिला योजना समिति के सदस्यों की संख्या ही पूरी नहीं है। उधर, प्रस्तावित जिला योजना को हरी झंडी दिखाने से पहले ग्राम पंचायतों की खुली बैठक बुलाकर विकास कार्यों के प्रस्ताव मांगे जाते हैं। इन प्रस्तावों को क्षेत्र पंचायतें अपनी कार्ययोजना में समाहित कर कार्ययोजना जिला पंचायत को भेजती हैं। जिला पंचायत क्षेत्र पंचायतों के प्रस्तावों को समाहित कर बैठाकर बुलाकर जिला योजना अनुमोदित करती है। जिला योजना द्वारा अनुमोदित प्रस्ताव प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली जिला योजना समिति की बैठक में रखा जाता है। इसी तरह से निकाय भी जिला योजना में शामिल करने के लिए विकास कार्यों का प्रस्ताव भेजते हैं। अभी निकायों का अस्तित्व नहीं होने से जिला योजना का 31 जुलाई तक खाका कैसे खींचा जाएगा, इस बारे में अधिकारी भी कुछ नहीं बता पा रहे।
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जिला योजना को 31 जुलाई तक अंतिम रूप देने संबंधी आदेश को लेकर ऊहापोह की स्थिति पैदा हो गई है। यह चर्चा शुरू हो गई है कि जब जिला पंचायत अध्यक्ष ही नहीं है तो गांवों में विकास के लिए तैयार कार्ययोजना का अनुमोदन कैसे किया जाएगा। कमोवेश यही स्थिति नगर क्षेत्र में विकास कार्यों की है। मिनी सदन अस्तित्व में नहीं होने से जिला योजना समिति में शामिल करने के लिए अभी निकायों के कोटे के 13 सदस्यों का चुनाव ही नहीं हो पाया है। इसके चलते अभी पूरी तरह से जिला योजना समिति का ही गठन नहीं हुआ है।
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कई कार्य हो सकते हैं प्रभावित
वाराणसी (ब्यूरो)। जिला योजना में 2011-12 में पशुपालन, दुग्ध विकास, ग्रामीण रोजगार, पंचायती राज, राजकीय लघु सिंचाई, सड़क एवं पुल, ग्रामीण व नगरीय पेयजल, ग्रामीण स्वच्छता, ग्रामीण आवास के अलावा अनुसूचित जाति, महिला, विकलांग कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के लिए काफी अधिक धनराशि खर्च करने की व्यवस्था की गई थी। चालू वित्तीय वर्ष में अभी जिला योजना ही नहीं बनने के कारण इन विभागों से संबंधित कार्यों के लिए धनराशि मिलने में देर होगी। धनराशि देर से मिलने के कारण प्रस्तावित कार्य भी समय से पूरे नहीं हो पाएंगे।
वित्तीय वर्ष 2011-12 में पशुपालन से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 32.43 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत थी। इसी तरह से 77 लाख रुपये दुग्ध विकास, 11.59 करोड़ रुपये ग्रामीण रोजगार, 11.49 करोड़ रुपये पंचायती राज, 1.50 करोड़ रुपये लघु सिंचाई, 22.50 करोड़ रुपये सड़कों व पुलों के निर्माण, 13.20 करोड़ रुपये ग्रामीण व 9.18 करोड़ रुपये नगरीय पेयजल, 1.26 करोड़ रुपये ग्रामीण स्वच्छता, 7.62 करोड़ रुपये ग्रामीण आवास से संबंधित कार्यों के लिए स्वीकृत हुए थे। इसके अलावा 13.54 करोड़ रुपये से अधिक धनराशि विभिन्न विभागों द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के लिए स्वीकृत थी। कुल 126.47 करोड़ रुपये की स्वीकृत जिला योजना के तहत प्रस्तावित कार्यों के क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर से संबंधित विभागों को 61 करोड़ रुपये दिए गए थे। जानकारों का कहना है कि अभी तो जिला योजना ही नहीं बनी है। जिला योजना बनने में अभी समय लगेगा। इसके बाद अनुमोदित कर उसे शासन को भेजा जाएगा। उसके बाद इसमें प्रस्तावित कार्यों के लिए शासन स्तर से धनराशि अवमुक्त की जाएगी। तब तक वित्तीय वर्ष का आधा समय बीत जाएगा। ऐसे में प्रस्तावित कार्यों के लिए न तो पूरी धनराशि मिल पाएगी और न ही कार्य ही पूरे हो पाएंगे।
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