32 साल से बगैर मान्यता के बीएचयू दे रहा डिग्री

Varanasi Updated Thu, 12 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। देश के अग्रणी शिक्षण संस्थानाें में बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान का नाम भले शुमार हो लेकिन यहां 32 वर्षों से डाक्टोरेट आफ मेडिसिन इन कार्डियोलाजी की डिग्री मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) से बगैर मान्यता की दी जा रही है। हालत यह हो गई है कि संस्थान से डिग्री लिए 38 पुरातन छात्राें के शैक्षणिक भविष्य पर ब्रेक लग गया है। इन छात्राें ने चिकित्सा विज्ञान संस्थान प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई है। यह खुलासा सूचना के अधिकार के तहत अंशुमान त्रिपाठी की ओर से मांगी गई जानकारी से हुआ है।
बीएचयू के डाक्टोरेट आफ मेडिसिन इन कार्डियोलाजी कोर्स की शुरूआत 1979 में की गई थी। एमसीआई से मान्यता के बगैर बीएचयू कार्यकारिणी परिषद और यूजीसी ने इस वर्ष कोर्स संचालित करने का निर्णय ले लिया। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियाें का यह निर्णय यहां के छात्राें के लिए मुसीबत बन गई। 1998 में एमसीआई ने मिनिमम क्वालीफिकेशन फार टीचर इन मेडिकल इंस्टीट्यूशन रेग्यूलेशन बना दिया। इस नियम के अनुसार हर सरकारी शिक्षण संस्थान में सुपर स्पेशिएलिटी कोर्स में लेक्चरर पद पर नियुक्ति के लिए डाक्टोरेट आफ मेडिसिन की एमसीआई से मान्यता होनी चाहिए। इधर बीएचयू कार्डियोलाजी विभाग में केवल एक प्रोफेसर ही वर्षों तक काम करते रहे जबकि एक प्रोफेसर के अलावा तीन लेक्चरर का होना जरूरी था। इस वजह से बीएचयू ने एमसीआई से निरीक्षण नहीं कराया। मार्च 2011 में जब तीन लेक्चरर की नियुक्ति हुई तो प्रोफेसर पद पर तैनात प्रो. पीआर गुप्ता इसी साल जून में सेवानिवृत हो गए। विभागीय अधिकारियाें की मानें तो 1991 में एमसीआई को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया था लेकिन टीम नहीं आई। अब तक प्रोफेसर पद पर बहाली के लिए प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इधर 1979 से 1984 के बीच पांच, 1986 से 1995 तक 18 तथा 1996 से 2011 के बीच 15 छात्र उत्तीर्ण हुए। ये छात्र वर्तमान समय में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानाें में तैनात हैं लेकिन एमसीआई से कोर्स की डिग्री मान्य नहीं होने से उनके पदोन्नति तथा परीक्षक बनने पर संबंधित संस्थानाें ने रोेक लगा दी है।

इतने दिनों तक एमसीआई से मान्यता क्याें नहीं मिली यह तो नहीं बता सकता हूं लेकिन अपने कार्यकाल में इसके लिए कई बार प्रयास कर चुका हूं। प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय के भर्ती सेल को लिखा गया है। जैसे ही वहां से अनुमति मिलेगी विज्ञापन प्रकाशित कर बहाली कर ली जाएगी। इसके बाद एमसीआई से मान्यता के लिए आग्रह किया जाएगा।
प्रो. टीएम महापात्रा, निदेशक चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू

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