गंगा-गोमती संगम के जल से मारकंडे महादेव अभिसिक्त

Varanasi Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
चौबेपुर। भले ही मुख्य मार्ग से तीन किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ी हो, मूसलधार वर्षा में भीगना पड़ा हो या फिर घंटों कतार में खड़े रहना पड़ा हो लेकिन शिव दर्शन की उत्कंठा भक्तों को शहर से करीब 23 किलोमीटर दूर कैथी स्थित मारकंडेय महादेव के मंदिर तक ले ही गई। सिर्फ वाराणसी ही नहीं अपितु पूर्वांचल भर से लगभग एक लाख की संख्या में शिव भक्तों का रेला गंगा-गोमती के संगम पर स्नान कर वहां के जल से सावन के प्रथम सोमवार पर बाबा का अभिषेक करने पहुंचा।
हर-हर महादेव और बोल बम का घोष कैथी क्षेत्र के वातावरण को दिनभर पवित्र करता रहा। मंदिर परिसर और परिसर के आसपास कहीं सत्यनारायण भगवान की कथा हो रही थी तो कहीं ब्राह्मणों की टोलियां महामृत्युंजय का जाप कर रही थीं। बहुतेरे लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों का मुंडन संस्कार कराते रहे। कुछ ऐसे भी लोग थे जो मंदिर के निकट ही बैठ कर बेलपत्रों पर राम नाम लिख रहे थे। ऐसी मान्यता है कि राम नाम लिखा बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। यही वजह है कि भक्तों ने एक सौ एक से लेकर सवा लाख बेलपत्र तक बाबा को अर्पित किए। पुत्र रत्न की प्राप्ति एवं पति की दीर्घायु कामना से व्रत रखने वाली महिलाओं ने पूरे मनोयोग से बाबा का दर्शन-पूजन किया। सावन के प्रथम सोमवार पर जलाभिषेक के लिए रविवार को मध्यरात्रि के उपरांत ही मंदिर का पट खुल गया था। भोर में चार बजे के बाद कांवरियों का रेला भी पहुंचना शुरू हो गया। सुबह दस बजे तक जबरदस्त भीड़ दिखी। इसके बाद भीड़ का दबाव कुछ कम हुआ। दोपहर बाद शहर के लोगों के पहुंचने का क्रम शुरू हुआ तो भीड़ फिर बढ़ने लगी। बाबा के दरबार में मत्था टेकने के लिए वाराणसी सहित गाजीपुर, बलिया, चंदौली, आजमगढ़, जौनपुर, इलाहाबाद, मऊ, गोरखपुर, देवरिया आदि विभिन्न जनपदों से काफी संख्या में भक्तगण पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस ने कंट्रोल रूम बनाया था। मंदिर के भीतर और बाहर छह सीसी टीवी कैमरे भी लगाए गए थे। घाट किनारे भी सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं के लिए रैन बसेरा भी बनवाया गया था। यातायात नियंत्रित करने केलिए कैथी चौराहे पर बैरिकेडिंग की गई थी।

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