बड़े-बड़े गड्ढे, खुले मैनहोल से हो कर जाएंगे शिवालय

Varanasi Updated Mon, 09 Jul 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। सावन की तैयारी में जिला और नगर निगम प्रशासन और लोक निर्माण विभाग महीने भर से लगा है, लेकिन सावन ही नहीं पहला सोमवार भाी आ गया पर शिवालयों तक जाने के मार्ग सुगम नहीं हो सके। हाल में जहां कहीं भी पैच वर्क हुआ या पहले से खोदी गई सड़क ों पर लेपन कार्य हुआ वहां अब बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं या सड़कें धंस गई हैं। अगर हल्की सी भी बारिश हो जाए तो जलजमाव के कारण राहगीरों को पता भी नहीं चलेगा और वे गड्ढ़ों में चले जाएंगे। इतना ही नहंीं नगर निगम का हाल तो यह है कि मैनहोल के ढक्कन तक गायब हैं। अब जलभराव की सूरत में कौन कब इसमें समा जाएगा कहा नहीं जा सकता। इन सब की ओर किसी का ध्यान ही नहंीं है। हाल में आल पुलिस अफसरों का इस ओर ध्यान गया और उन्होंने संबंधित विभाग को चेताया तो उन गड्ढ़ों में बड़े-बड़े बोल्डर डाल कर मिट्टी फेंक दी गई। नतीजा बरसात में वे और भी खतरनाक हो गए हैं। यानी शिव भक्त जान जोखिम में डाल कर ही पहुंच पाएंगे शिवालयों तक।
अब किसी को महामृत्युंजय महादेव या जोगेश्वर महादेव (जैगीषव्येश्वर महादेव) मंदिर ईश्वरगंगी जाना हो तो सारे करम हो जाएंगे। चाहे नाटी इमली से आएं यो पिपलानी कटरा से अथवा डीएवी कालेज की ओर से तीनों में से किसी भी रास्ते से स्वयंभू शिवलिंग जोगेश्वर महादेव का दर्शन करने वालों कोे रास्ते में उखड़ी हुई सड़क। थोड़ी-थोड़ी दूर पर गड्ढे और तो और खुले हुए मैनहोल, कूड़ों का अम्बार, परीक्षा लेने के लिए तैयार हैं। लगभग दो माह पूर्व पाइप लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़क को आनन-फानन में समतल तो कर दिया गया। लेकिन बरसात होते ही सड़क जगह-जगह से धंसने लगी है। क्षेत्रीय निवासियों के मुताबिक बीते शनिवार को मुख्य मार्ग पर एक ट्रक धंस गया,जिसे निकालने के लिए उन्होंने भरपूर सहयोग किया। इसी क्षेत्र में औसानगंज तिराहे पर सड़क के बीचों बीचे मैनहोल का ढक्कन टूटा हुआ है जिसे ईंटों से किसी तरह ढंका गया है। कोतवाली तिराहे के सामने भी बीच सड़क पर मैनहोन का ढक्कन टूटा हुआ है। महामृत्युंजय मंदिर जाने के लिए सिर्फ और सिर्फ मैदागिन की ओर से प्रवेश करना ही आरामदायक होगा। इस तरफ से रास्ता फिलहाल तो ठीक है लेकिन अगली एक-दो बारिश के बाद यह सड़क भी चलने लायक नहीं रह जायेगी।
उधर इलाहाबाद से जीटी रोड होते बाबा विश्वनाथ दरबार में जाना हो तो मोहनसराय ओवरब्रिज के पास बने गड्ढों से हो कर जाना होगा। इस मार्ग को दो दिन पूर्व मिट्टी और गिट्टी डालकर दुरुस्त किया गया था। लेकिन बारिश में सब बह गया। ऐसे में अब कांवरियों की तो जान जोखिम में पड़ ही रही है, सर्वाधिक दिक्कत तो डाक बम को होगी जो प्रस्थान स्थल से मंजिल तक दौड़ते आते हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर यह सड़क खास तौर पर शिव भक्तों की भीड़ के मद्देनजर बनी थी पर विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई। मोहनसराय से मुड़ैला तक दोनाें तरफ फुटपाथ भी जहां-तहां क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसा लगता है कि काशी में प्रवेश के पूर्व कावंरियाें को अग्निपरीक्षा देनी होगी। यहां से आगे आएं तो मुड़ैला, मड़ुवाडीह से होते महमूरगंज चौकी से सीधे गोदौलिया तक न जाने कितने गड्ढ़े और खुले मैनहोल इन कांवरियों का इंतजार कर रहे हैं चोटिल करने को। एन रथयात्रा से गिरिजाघर के बीच कंकटाकीर्ण हैं मार्ग। उधर केदारेश्वर महादेव जाने के लिए रथयात्रा-भेलूपुर होते सोनारपुरा जाना भी कम दुरुह नहीं। गिरिजाघर से रेवड़ी वाला मार्ग भी कम सकंट वाला नहीं है। लहुराबीर क्षेत्र में ऐसे नजारे चौराहे के आसपास से लेकर पिपलानी कटरा मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्थानों पर देखे जा सकते हैं।


वर्जन
जिन मार्गों पर गड्ढे हैं उन्हें चिह्नित कर गिट्टी से पाटा जा रहा है। चूंकि बारिश हो रही है ऐसी स्थिति मेें तारकोल का कार्य नहीं कराया जा सकता। मौसम ठीक होते ही उसे दुरुस्त करा लिया जाएगा। आरके तिवारी, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी।

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