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नतीजा देने में फिसड्डी रहा बनारस

Varanasi Updated Sun, 08 Jul 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। निकाय चुनाव के नतीजे देने में बनारस सबसे फिसड्डी रहा। इसकी मुख्य वजह बदइंतजामी रही। महापौर पद के प्रत्याशियों की गणना दिन में दो बजे पूरी हो गई थी लेकिन मतों की अंतिम सूची रात करीब नौ बजे जारी हो पाई। सात घंटे केवल वोटों को जोड़ने और कंप्यूटर में डाटा फीड करने में लग गए।
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पहले चरण में नगर निगम के 45 वार्डों की गणना का काम दिन में 11 बजे के करीब पूरा हो गया। उसके बाद विजयी प्रत्याशी प्रफुल्लित होकर बाहर निकलने लगे। इस समय तक प्रशासन वोटों का टेबुलेशन नहीं कर पाया था। कई टेबुलों पर तो निर्धारित स्टेशनरी और प्रोफार्मा तक नहीं पहुंच पाए थे। कुछ गणनाकर्मियों ने तो हारने-जीतने वाली प्रत्याशियों का हस्ताक्षर तक नहीं कराया। मतगणना को जोड़ने के लिए 99 गणक लगाए गए थे लेकिन उसे फीड करने के लिए एक कंप्यूटर था। उस पर भी ठीक से काम नहीं हो पा रहा था। जब शाम छह बज गए तो प्रशासन ने कंट्रूोल रूम में रखा कंप्यूटर मंगवाया और एक लैपटाप लगाया गया। तब फीडिंग के काम में तेजी आई। इस बीच तीन बूथों के नतीजे ही गायब हो गए। उनको खोजने के लिए मतगणना कक्ष की मेजों के नीचे अधिकारी झांकते रहे।

सैकड़ो वोट बरबाद हुए
वाराणसी। नगर निगम में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के जरिए मतदान होने के कारण मत अवैध तो नहीं हुए लेकिन रामनगर और गंगापुर में काफी वोट अवैध घोषित हुए। रामनगर के वार्ड संख्या एक वाजिदपुर उत्तरी में हार-जीत का अंतर 29 वोटों का था लेकिन यहां 38 मत निरस्त हो गए। वार्ड संख्या तीन में 17 वोटों के अंतर से बाजी पलट गई, जबकि यहां 70 वोट बट्टे खाते में चले गए। वार्ड संख्या दो में 73, तीन में 70, चार में 59, पांच में 40, छह में 55, आठ में 23 और नौ में 53 मत अवैध घोषित हुए। अध्यक्ष पद के 1222 वोट अवैध घोषित हुए।


मतदान का आंकड़ा हुआ गलत साबित
वाराणसी। वोटिंग के दिन प्रशासन ने नगर निगम में 38.05 फीसदी मतदान की सूचना आयोग को भेजी थी। पीठासीन अधिकारियों की पुस्तिका से उसका मिलान तक नहीं किया गया। मतदान के बाद यह आंकड़ा घट कर 35 फीसदी आ गया है। रामनगर और गंगापुर के मतों में ज्यादा अंतर नहीं आया है।
नगर निगम चुनाव में प्रशासन ने मतदान का प्रतिशत रैंडम सैंपलिंग के जरिए तैयार किया और उसे आयोग को फैक्स कर दिया गया था। वोटिंग मशीनों को जमा कराते समय पीठासीन अधिकारियों से मतदान के आंकड़ों का मिलान नहीं किया गया। तब प्रशासनिक आंकड़ों पर सवालिया निशान लगाया गया था। मतदान के आंकड़ों में तीन फीसदी की कमी आई है। लगभग 30 हजार वोटों का अंतर आया है।
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