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पीएम के दूत श्रीप्रकाश जायसवाल ने शंकराचार्य को दिलाया भरोसा, गंगा पर नए प्रोजेक्ट पर काम नहीं

Varanasi Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। प्रधानमंत्री के दूत बनकर काशी आए कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल के आश्वासन पर ज्योतिष एवं द्वारका-शारदापीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शुक्रवार को कबीर चौरा अस्पताल में भर्ती सभी तपस्वियों को जल ग्रहण कराकर पांच माह पुरानी तपस्या को विराम दे दिया। इससे पहले कोयला मंत्री ने शंकराचार्य को आश्वस्त किया कि तत्काल प्रभाव से गंगा और उसकी सहायक नदियों पर किसी नई बांध परियोजना पर काम नहीं होगा। इतना ही नहीं, पहले से प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए अंतर मंत्रिमंडलीय समूह का गठन कर दिया गया है। यह समूह तीन महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। उस रिपोर्ट पर मंथन के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। श्रीप्रकाश जायसवाल के इस आश्वासन के बाद शंकराचार्य ने गंगा तपस्या को विराम देने की घोषणा के साथ ही यह चेताया भी कि तपस्या सिर्फ स्थगित हुई है, गंगा की अविरलता-निर्मलता बहाल न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। केंद्र को तीन महीने की मोहलत दी गई है, मियाद बीतने के बाद भी बात नहीं बनी तो दिल्ली कूंच किया जाएगा।
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इससे पूर्व शुक्रवार को दिन में 11 बजे कोयला मंत्री गंगा मुक्ति संग्राम के संयोजक कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम के साथ विद्यामठ पहुंचे। शंकराचार्य का आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने दो पृष्ठ का भरोसा पत्र दिया। कोयला मंत्री के लेटरहेड पर लिखे पत्र का अध्ययन करने के बाद शंकराचार्य, श्री जायसवाल के साथ कबीर चौरा स्थित मंडलीय अस्पताल गए और दो साध्वियों समेत सात संतों को भावुक माहौल में जल पिलाकर तपस्या पूरी कराई गई। हालांकि यह पत्र भी जंतर-मंतर पर संतों के हुंकार भरने से पहले 15 जून, को पीएमओ के मंत्री नारायण सामी की ओर से जारी आश्वासन पर ही केंद्रित है। कोयला मंत्री ने सामी के पुराने ड्राफ्ट का ही सख्ती से पालन कराने को कहा, जबकि शंकराचार्य उस चिट्ठी को पहले ही अपर्याप्त करा दे चुके हैं। गंगा, उसकी सहायक नदी अलकनंदा और भागीरथी पर प्रस्तावित परियोजनाओं की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री के निर्देश पर अंतर मंत्रिमंडलीय समूह के गठन की जानकारी भी शंकराचार्य को कोयला मंत्री ने दी। बताया कि योजना आयोग के सदस्य वीके चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाले समूह की रिपोर्ट तीन महीने में आने की संभावना है। इस अवधि तक प्रस्तावित बांधों पर काम रोकने का जिक्र कोयला मंत्री के आश्वासन पत्र में नहीं है लेकिन इस आशय के सवाल पर मौखिक रूप से उन्होंने कहा कि रिपोर्ट न आने तक काम नहीं होगा।

ये अंदर के पन्नों के लिए है

14 जनवरी को गंगा सागर में गंगा मुक्ति का संकल्प लेकर शुरू हुई थी तपस्या
15 जनवरी को प्रयाग में सानंद ने अन्न त्याग की की थी घोषणा
09 मार्च से काशी में शुरू हुई जल त्याग तपस्या
165 दिन तक गंगा मुक्ति को संतों ने किया तप

पांच लोगों ने गंगा मुक्ति की तपस्या का लिया था संकल्प
सानंद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, कृष्णप्रिया, गंगा प्रेमी भिक्षु, जल पुरुष राजेंद्र सिंह

ये हैं गंगा तपस्वी
सानंद, गंगा प्रेमी भिक्षु, कृष्णप्रियानंद, साध्वी पूर्णांबा, साध्वी शारदांबा, कर्म संन्यासी योगेश्वरानंद, औघड़ ब्रह्मरंध्र, शिवमोहन, प्रमोद मांझी
(सानंद, ब्रह्मरंध्र पहले ही जल पी चुके थे)

कोट
केंद्र और शंकराचार्य के बीच गंगा मुक्ति को लेकर पहल सकारात्मक रही है। गंगा की अविरलता -निर्मलता के लिए चरणबद्ध तरीके से केंद्र सरकार कार्रवाई करेगी-श्रीप्रकाश जायसवाल, केंद्रीय कोयला मंत्री

कोट
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की भावना का ख्याल रखते हुए तपस्या को विराम दिया गया है। गोमुख से गंगासागर तक मुझे अविरल-निर्मल गंगा चाहिए। अविरलता बहाल होने तक गंगा सेवा अभियानम का आंदोलन जारी रहेगा-स्वरूपानंद सरस्वती, शंकराचार्य

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