बीएचयू आईटी बन गया आईआईटी

Varanasi Updated Sat, 30 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। लंबी लड़ाई के बाद बीएचयू आईटी शुक्रवार को आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी बन गया। इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। कुलपति डा. लालजी सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि अब नई चुनौतियों से जूझते हुए बेहतर करना है। हालांकि, इस बारे में विधि मंत्रालय की ओर से आधिकारिक गजट 21 जून को ही जारी हो गया था, लेकिन यह प्रभावी शुक्रवार से हुआ है। इसके पहले द इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (संशोधन) बिल लोकसभा में 24 मार्च 2011 और राज्यसभा में पास हो गया था।
आईआईटी बनने की सूरत में पिछले तीन वर्षों से प्रौद्योगिकी संस्थान से पास होने वाले छात्रों को उपाधियों का वितरण नहीं किया जा रहा था। अब ऐसे लगभग 1800 छात्रों को आईआईटी की डिग्री मिलने का रास्ता साफ हो गया है। आईआईटी संशोधन एक्ट 2012 में साफ कहा गया है कि मौजूदा निदेशक अपने पद पर तब तक बने रहेंगे जब तक नए निदेशक की नियुक्ति नहीं हो जाती है। दिल्ली में मौजूद निदेशक प्रो. जेएन सिन्हा ने बताया कि यह खुशी की बात है कि शुक्रवार से आईआईटी बिल प्रभावी हो गया। इससे संस्था के विकास तथा शोध कार्यों को विशेष बल मिलेगा।
ज्ञात हो कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सबसे पहले 1919 में बनारस इंजीनियरिंग कालेज (बैंको), 1923 में कालेज आफ माइनिंग एंड मैटलर्जी (मिनमेट) तथा कालेज आफ टेक्नालाजी (टेक्नो) की स्थापना की गई थी। आईआईटी के अस्तित्व में आने के बाद इन तीनों को मिलाकर 1971 में इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी (आईटी) का गठन किया गया।

नई जिम्मेदारी मिली है। नया कांसेप्ट विकसित करना है। आईआईटी कानपुर के सब आर्डिनेंस को मंगाकर अध्ययन किया जाएगा। आशा है कि आईटी के फैकल्टी मेंबर तथा स्टाफ एक दूसरे के सहयोग से काम करेंगे तथा विश्वविद्यालय के प्रति समर्पित रहेंगे। - डा. लालजी सिंह, कुलपति
.ये भी दे चुका हूं

- आईटी की सभी चल अचल संपत्तियां आईआईटी वाराणसी के अधीन होंगी
- बीएचयू वीसी होंगे बोर्ड आफ गवनर्स के होंगे मानद चेयरमैन
- नए निदेशक नियुक्त होने तक आईटी निदेशक बने रहेंगे पद पर
- आईटी के सभी कर्मचारी आईआईटी के अधीन होंगे

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