पुराने कपड़ों से तैयार हो रही कालीन

Varanasi Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। फटे-पुराने कपड़ों और जींस से तैयार होने वाली रंग-बिरंगी कालीन ने मंदी के दौर से गुजर रहे पूर्वांचल के कालीन उद्योग की रंगत ही बदल दी है। यह ऊनी कालीन से काफी सस्ती और हल्की है, जिससे इसे इधर-उधर ले जाना काफी आसान है। सस्ती होने की वजह से विदेशी ग्राहक इसे खूब पसंद कर रहे हैं।
निर्यातकों की मानें तो यह कालीन 20 से 25 डालर प्रति मीटर के हिसाब से बिकती है। निर्यातकों ने इसका नाम माडर्न कालीन रखा है। बनारस में लगने वाले कालीन मेले में यह धूम मचाएगी, क्योंकि पूर्वांचल के अधिकांश निर्यातक इस तरह की कालीन तैयार करवा रहे हैं। निर्यातक दीपक माहेश्वरी ने बताया कि सस्ती और रंग-बिरंगी आकर्षक डिजाइन की वजह से विदेशी ग्राहक देखते ही इसे पसंद कर लेते हैं। पुरानी जींस, साडि़यों एवं अन्य कपड़ों से बनने वाली इस कालीन को तैयार करने में दो से तीन दिन लगते हैं। निर्यातक उमेश कुमार गुप्ता का कहना है कि विदेश में नई पीढ़ी इस कालीन को काफी पसंद कर रही है। उन्होंने बताया कि इसके लिए पुराने कपड़े अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली से मंगाते हैं। साथ ही कपड़े की मिलों से डिफेक्टिव कपड़ा भी मंगाया जाता है। विधायक जाहिद बेग का कहना है कि इस कालीन की मांग बढ़ने से बुनकरों को फिर रोजगार मिलने लगा है।

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