लकवा को हवा की बीमारी मानते हैं बनारसी

Varanasi Updated Wed, 27 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। लकवा (पक्षाघात) को अभी भी आधे से अधिक बनारसी हवा की बीमारी मानते हैं। इतना ही नहीं, अधिकांश लोगों की यह धारणा है कि बीमारी से बचाव संभव नहीं है क्याेंकि हवा कभी भी लोगाें को चपेट में ले सकती है। इस तथ्य का खुलासा बीएचयू के न्यूरोलाजी विभाग के चिकित्सकाें ने सर्वेक्षण में किया।
न्यूरोलाजी विभाग के डा. वीएन मिश्रा के नेतृत्व में चिकित्सकाें के दल ने वाराणसी जिले के विभिन्न हिस्साें और अलग-अलग वर्गों में 17 जून से तीन दिन तक सर्वे किया। इसमें बीएचयू ओपीडी में लकवा के उपचार के लिए आए 314 मरीज और बाहर के 686 लोगों को शामिल किया गया। इसमें 600 शहरी और 400 ग्रामीण क्षेत्र के लोग शामिल किए गए। 25 से 45 वर्ष उम्र के विभिन्न पेशे और संप्रदाय के लोग थे, जिन्हाेंने अपनी राय चौंकाने वाली दी। चिकित्सकाें ने सवाल के जवाब में एक हजार में 506 ने लकवा को हवा की बीमारी बताया जबकि 494 ने ऐसा मानने से इंकार किया। एक हजार में 87 को बीमारी के बारे में जानकारी ही नहीं थी। हालांकि कोई भी इसे भूत की बीमारी मानने को तैयार नहीं हुआ। 166 लोगों ने लकवा का कारण शराब और सिगरेट का सेवन माना, जबकि 649 लोगों ने ब्लड प्रेशर, सुगर और अनुवांशिकी को लकवा का कारण बताया। अस्पताल के ओपीडी में आने वाले और वार्ड में भर्ती मरीजाें को बीमारी की जानकारी दी जा रही है।

Spotlight

Most Read

Lucknow

ओपी सिंह होंगे यूपी के नए डीजीपी, सोमवार को संभाल सकते हैं कार्यभार

सीआईएसएफ के डीजी ओपी सिंह यूपी के नए डीजीपी होंगे। शनिवार को केंद्र ने उन्हें रिलीव कर दिया।

20 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: श्रीलंका का ये सांस्कृतिक नृत्य देख कर झूम उठेंगे आप

बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में गुरुवार की शाम श्रीलंकाई कलाकारों के नाम रही। यहां श्रीलंका से आए 10 कलाकारों के ‘ठुरैया ग्रुप’ ने पारंपरिक नृत्य से समां बांध दिया।

20 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper