हड़ताल पर रहे प्राइवेट चिकित्सक

Varanasi Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) को भंग करने, मेडिकल काउंसिल को नियंत्रित करने के लिए नेशनल कमीशन का गठन करने तथा क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने के विरोध में सोमवार को निजी डाक्टरों की हड़ताल का मिला-जुला असर रहा। नर्सिगिं होम और निजी अस्पतालों से मरीज लौटा दिए गए। कई अस्पतालों में मरीज डाक्टर का इंतजार करते देखे गए। क्लीनिक में बैठने के बजाय चिकित्सक आईएमए में एकत्र हुए। विरोध प्रदर्शन किया और कमिश्नर तथा डीएम को ज्ञापन सौंपा। हालांकि कुछ क्लीनिकों में मरीज देखे भी गए। रोज की अपेक्षा सरकारी अस्पतालों में मरीजों की ज्यादा भीड़ नजर आई।
आईएमए के आह्वान पर सोमवार को जहां अधिकांश क्लीनिक बंद दिखे वहीं कुछ खुले भी नजर आए। ज्यादातर पैथालाजी केंद्र बंद रहे, जबकि कुछ केंद्रों में जांच भी होती रही। हड़ताल के चलते प्राइवेट अस्पतालों में मरीज कराहते देखे गए, जबकि रोज की तरह क्लीनिक पहुंचने वाले मरीज डाक्टर का इंतजार कर लौट गए। आईएमए की मानें तो हड़ताल सफल रही। यदि कहीं मरीजों का उपचार किया गया तो ऐसा उनकी गंभीर हालत को देखकर किया गया होगा। वैसे भी इमरजेंसी सेवा को हड़ताल से दूर रखा गया था। हालांकि जिस हड़ताल का आह्वान आईएमए की ओर से किया गया था, उसी के विरोध प्रदर्शन में उम्मीद के मुताबिक डाक्टर नहीं जुटे। अर्दली बाजार, सुंदरपुर और लंका के कुछ निजी अस्पतालाें में ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठे जिससे मरीजाें को लौटना पड़ा। जहां तक रही विरोध प्रदर्शन की बात तो आईएमए सभागार में अध्यक्ष डा. केसी गुप्ता की अध्यक्षता में धरना की जगह हुई संगोष्ठी में चिकित्सकाें ने केन्द्र सरकार की नीतियाें का खुलकर विरोध किया। उनका कहना था कि एमसीआई भंग करना, मेडिकल कौंसिल को नियंत्रित करने के लिए नौकरशाहाें की कमेटी गठित करना और क्लीनिकल इस्टेब्लिसमेंट एक्ट लागू करने से निजी चिकित्सकाें की परेशानी बढ़ जाएगी। संगोष्ठी में डा. संजय राय, डा. आलोक भारद्वाज, डा. अनुराग टंडन, डा. आलोक ओझा, डा. अजीत सगैल, डा. कुसुम चंद्रा, डा. बीएम गुप्ता, डा. संजीव, डा. पीएस पांडेय आदिं ने विचार व्यक्त किए। इसके पश्चात कमिश्नर और डीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
कोट
हड़ताल में एमबीबीएस के अलावा सभी डिग्रीधारक शामिल हुए। जहां तक कुछ अस्पतालाें में ओपीडी चलने की बात है तो हड़ताल का शत-प्रतिशत दावा नहीं किया जा सकता है। यदि किसी अस्पताल में मरीज देखे गए हाेंगे तो ऐसा मरीजों की हालत देखकर किया गया होगा-डा. केसी गुप्ता, अध्यक्ष आईएमए बनारस

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