ससुराल से विदा हुए भगवान जगन्नाथ

Varanasi Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। रथयात्रा से रविवार की अलसुबह एक तरफ भगवान जगन्नाथ कुनबे के साथ विदा हुए तो दूसरी ओर शिवपुर में शाम को मोहक मेला गुलजार हो गया। यहां शाम चार बजे रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की प्रतिमाओं की भव्य आरती के साथ पुरानी चुंगी के पास लोग प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। इसी के साथ 102 साल पुरानी मेले की परंपरा जीवंत हो उठी।
शिवपुर में पं. अशोक दुबे और नीरज दुबे के आचार्यत्व में भगवान जगन्नाथ की आरती हुई। सड़कों की खराब स्थित के बावजूद बाबतपुर से लेकर आसपास के इलाकों से बड़ी तादाद में लोग पहुंचे। भगवान का हरियाली शृंगार किया गया था। रात साढ़े 11 बजे सविधि पूजा-आरती के साथ पट बंद हो गए। गंवई मिजाज का मेल देखते बना। पुजारी अशोक दुबे के मुताबिक 1910 में बटुक नाथ पांडेय ने इस रथयात्रा की शुरुआत की थी। उधर, रथयात्रा में तीन दिन तक ससुराल में स्वास्थ्य लाभ करने के बाद भगवान जगन्नाथ के विग्रह को सुबह पांच बजे अस्सी ले जाया गया। अस्सी स्थित मंदिर में विग्रह को रखा गया। यहां पुजारी पं. श्रीराम शर्मा ने मंगला आरती की। इसी के साथ अस्सी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू हो गए।

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