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गंगा नहीं करतीं किसी तरह का भेदभाव : रजा मुराद

Varanasi Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गंगा हिंदू और मुस्लिम में कोई भेद नहीं करतीं हैं। इससे हमें सीख लेनी चाहिए। मुसलमान इसी जल से वजू करता है तो हिंदू के सारे धार्मिक अनुष्ठान इसी से होते हैं। काशी में तो गंगा का स्वरूप ही अद्भुत नजर आता है। मैं तो जब भी बनारस आता हूं गंगा तट पर जरूर जाता हूं। ये बातें फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने शुक्रवार की सुबह कैंटोमेंट स्थित एक होटल में बातचीत के दौरान कहीं। वह महापौर पद के प्रत्याशी सुधीर सिंह के समर्थन में यहां आए थे।
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देर शाम वह कबीरचौरा स्थित मंडलीय अस्पताल गए और गंगा की अविरल धारा के लिए अन्न-जल त्याग कर लंबे समय से तपस्या कर रहे साधु-संतों से मिले। वहां उन्होंने इमरजेंसी में भर्ती साध्वी पूर्णांबा, शारदांबा के अलावा ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद की दशा देखी। भिक्षु बाबा, कर्म सन्यासी योगेश्वरानंद महाराज से भी मिले। प्राइवेट वार्ड संख्या 10 के उस केबिन में भी गए जहां बाबा नागनाथ भर्ती हैं। रजा मुराद ने तपस्वियों से मिलने के बाद केंद्र सरकार की संवेदनहीनता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तपस्वियों की प्राणरक्षा के लिए जल्द कदम उठाए जाने चाहिए। फिल्म अभिनेता ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और बाबा रामदेव दोनों ने जो मुद्दे उठाए हैं, वे बेहद जरूरी हैं। भ्रष्टाचार और काला धन का खात्मा होना चाहिए। मगर दोनों के आंदोलन के तौर-तरीकों से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने नई सड़क स्थित लंगड़ा हाफिज के मस्जिद में नमाज अदा की। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब्दुल कलाम अच्छे हैं लेकिन राष्ट्रपति के रूप में अब नए आदमी को मौका मिलना चाहिए। इस पद के लिए प्रणव मुखर्जी सबसे अच्छे हैं।
सुधीर के समर्थन में रजा मुराद ने किया रोड शो
वाराणसी। फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने मेयर पद के प्रत्याशी सुधीर सिंह के समर्थन में रोड शो किया। उल्फत बीबी का हाता, नदेसर आदि इलाकों में घूमे। इससे पूर्व बातचीत में उन्होंने कहा कि सुधीर से चिरईगांव विधानसभा उपचुनाव के दौरान रिश्ते बने थे। उनके पुत्र रतनवीर अभिनेता हैं। बाबा रामसा पीर फिल्म में मैं उसका फिल्मी पिता बना हूं। उन्होंने शेर ‘आगाज है क्या मालूम नहीं, अंजाम है क्या मालूम नहीं। हमको तो मोहब्बत है तुमसे, आगे का हमें मालूम नहीं’ सुनाते हुए कहा कि दोनों के प्रेम में यहां प्रचार करने आ गया हूं। कहा, सर्कस में एक पहिया, सूबे में दो पहिया की सवारी चल रही है और सुधीर तो तीन पहिया लेकर आ गए हैं। वह जवान हैं और उनके दिलों में कुछ करने का जज्बा है। स्कूलों में अभिभावकों के शोषण के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई है। फिरकापरस्त और जातिवादी ताकतें वोटों को बांटने की कोशिश करती हैं। उनसे सजग रहने की जरूरत है। इस दौरान प्रत्याशी सुधीर सिंह और उनके अभिनेता पुत्र रतनवीर भी थे।
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