मॉक ड्रिल ने खोल दी डिजास्टर मैनेजमेंट की पोल

Varanasi Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। कैंट स्टेशन को उड़ाने की आतंकी धमकी के मद्देनजर गुरुवार को जीआरपी, आरपीएफ और सिविल पुलिस ने अपनी तैयारी परखी, लेकिन रिहर्सल में जो दिखा वह मजाक से ज्यादा कुछ और नहीं था। लोगों के जेहन में यह सवाल कौंधता रहा कि आतंकियों से स्टेशन को ऐसे कैसे महफूज रखा जा सकेगा। ऐसा होना लाजिमी भी था। आखिर आपने कहीं देखा है कि बिना हेलमेट के वह भी सफारी पहने बम डिस्पोजल दस्ते को। जिस वक्त मॉक ड्रिल चल रहा था उस समय न तो प्लेटफार्म से ट्रेन हटाई गई और न ही यात्रियों को संदिग्ध अटैची से दूर किया गया। मौके पर न दमकल दिखा और न ही एंबुलेंस। यहां तक कि पुलिस और रेलवे का एक भी उच्चाधिकारी नजर नहीं आया।
कैंट स्टेशन पर दिन के साढ़े 11 बजे अचानक जब बम की सूचना प्रसारित की गई तो यात्री उल्टे पांव भागने लगे। जहां बम रखने की सूचना दी गई वह स्थान जीआरपी ने रस्सी से घेर दिया। डाग स्क्वायड से अटैची की जांच कराई गई। पास खड़ी बाइक की भी जांच की गई। बम डिस्पोजल दस्ते ने अटैची को रस्सी से बांधकर पुल की सीढ़ी से दो बार नीचे फेंका। जब पूरा इत्मीनान हो गया कि अटैची में बम नहीं है तो उसे खोला गया। उसमें कपड़ा मिलने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली। इसके साथ ही प्लेटफार्म नंबर सात पर बेगमपुरा एक्सप्रेस, एक नंबर पर शालीमार एक्सप्रेस, बलिया पैसेंजर आदि ट्रेनों की जांच की गई। यात्रियों के सामान भी खंगाले गए।
स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को जब यह अहसास हो गया कि यह मॉक ड्रिल था तो उनमें पुलिस की कार्यप्रणाली पर चर्चा भी शुरू हो गई। कई यात्री जहां यह कहते सुने गए कि वास्तव में बम होता तो पुलिस कुछ कर नहीं पाती, क्योंकि आतंकी घटनाओं से निबटने की जो तैयारी होनी चाहिए, वैसा कुछ नहीं दिखा। एक यात्री का कहना था कि दो बार जब अटैची को पुल पर से फेंका गया तो ट्रेन वहीं खड़ी थी, उसे भी नहीं हटाया गया, जबकि यदि बम होता और वह फट गया होता तो ट्रेन के परखच्चे उड़ जाते। पुलिस का यह रिहर्सल लोग 20 मीटर दूर से देख रहे थे, जबकि लोगों को 50 मीटर दूर ही रोक देना चाहिए था। प्लेटफार्म नंबर चार और पांच जहां मॉक ड्रिल चल रहा था वहां न तो पुलिस का कोई उच्चाधिकारी नजर आया और न ही रेलवे का। मॉक ड्रिल के लिए सीओ रामजीत यादव के नेतृत्व में सात टीमें गठित की गई थीं। इनमें जीआरपी प्रभारी त्रिपुरारी पांडेय, आरपीएफ प्रभारी कमलेश्वर सिंह और अन्य जवान शामिल थे।

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