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तपस्वियों ने एम्स जाने का प्रस्ताव ठुकराया

Varanasi Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गंगा को बांध मुक्त बनाने के मसले पर प्राणोत्सर्ग के लिए तैयार तपस्वियों को यूपी से दिल्ली स्थानांतरित करने की कोशिशों पर बुधवार को पानी फिर गया। ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद और बाबा नागनाथ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जाने संबंधी प्रस्ताव को ठुकरा दिया। कबीरचौरा अस्पताल से मुक्त कराने संबंधी प्रशासन की ओर से तैयार कराई गई चिट्ठी पर दस्तखत करने को दोनों तपस्वी राजी नहीं हुए। इतना ही नहीं उन्होंने आरोप भी लगाया कि गंगा मुक्ति आंदोलन को कमजोर करने के लिए ऐसी साजिशें रची जा रही हैं। इसे किसी भी दशा में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

दो दिन पहले हजरत अली के यौमे विलादत समारोह में आए गंगा मुक्ति महासंग्राम के संयोजक कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम की जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद ही प्रशासन दोनों तपस्वियों को दिल्ली भेजने की तैयारी में जुट गया था। उन्होंने ही तपस्वियों को दिल्ली ले जाने का सुझाव रखा था। तब गंगा सेवा अभियानम की ओर से भी कुछ तपस्वियों के दिल्ली जाने की संभावना से इनकार नहीं किया गया था। इस बीच कृष्णप्रियानंद और बाबा नागनाथ को एम्स ले जाने के लिए कबीरचौरा अस्पताल से डिस्चार्ज कराने की चिट्ठी तैयार करा दी गई। वह पत्र लेकर एसीएम फर्स्ट अस्पताल गए तो दोनों तपस्वी बिफर पड़े। उन्होंने प्रशासन के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। तमाम कोशिशों के बाद भी दोनों तपस्वी दस्तखत करने को तैयार नहीं हुए। पत्र में लिखा गया था कि वह बेहतर इलाज के लिए कबीरचौरा अस्पताल से मुक्त होकर एम्स जाना चाहते हैं। इस अस्पताल से मुक्त होने के बाद फल और जल लेते रहने की भी बात पत्र में शामिल की गई थी। लेकिन, अंतत: एसीएम को खाली हाथ लौटना पड़ा।


बयान
मैंने जल-फल लेने या दिल्ली के एम्स जाने की कभी इच्छा नहीं जताई थी। मैं गंगा की अविरल धारा के लिए तपस्या कर रहा हूं। आंदोलन को कमजोर करने के लिए ऐसी बातें प्रचारित कराई जा रही हैं-ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद

दिल्ली जाकर नाटक करने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। प्रशासन की ओर से तैयार कराया गया पत्र देखकर मैं हैरत में पड़ गया। एसीएम उस पत्र पर मेरा हस्ताक्षर कराना चाहते थे। उस पत्र में फल-जल लेने की भी बात लिखी गई थी। इस साजिश की जांच कराई जानी चाहिए-बाबा नागनाथ

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