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डीएम से सुशील के मिलने के बाद बदला समीकरण

Varanasi Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नोटिस की नींव तो पिछले माह ही पड़ गई थी। उस दौरान विधायक सुशील सिंह के भाई जिला पंचायत सदस्य सुजीत सिंह के नेतृत्व में 26 सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष पर मनमाने तरीके से कार्य करने सहित अन्य आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से मिलकर शिकायत की थी।
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बीते मंगलवार को दोपहर में विधायक सुशील सिंह जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे और उसके बाद तेजी से समीकरण बदला। डीएम से मुलाकात के बाद विधायक ने भोजूबीर स्थित एक भवन में पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिलीप चौबे, अरुण सिंह व कुछ अन्य करीबियों को बुलाया। यहीं अविश्वास प्रस्ताव की रणनीति तय कर नोटिस का मजमून तैयार कराया गया। इसके बाद शाम को पूर्व में जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सभी 26 सदस्यों को बाबतपुर स्थित एक होटल में बुलाया गया। रात में ही करीब एक दर्जन सदस्य पहुंच गए। यहां दावत का दौर चला। बाकी सदस्य सुबह दस बजे तक होटल पहुंचे। तीन सदस्य निर्धारित समय तक जब होटल नहीं पहुंचे तो दोपहर बाद ढाई बजे के करीब 23 सदस्यों के साथ गाडि़यों के काफिले में विधायक के भाई सुजीत सिंह जिलाधिकारी से मिलकर नोटिस देने के लिए रवाना हुए। विकास भवन पहुंचने के बाद भी उन तीनों सदस्यों से संपर्क साधने की कोशिश चलती रही। जब वे नहीं आए तो नोटिस पर मौजूद 23 सदस्यों से हस्ताक्षर कराया गया। उधर, अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए सदस्यों के पहुंचने की भनक मिलते ही काफी संख्या में पुलिस फोर्स विकास भवन पहुंच गई। भूतल से लेकर द्वितीय तल तक चारों तरफ फोर्स लगा दी गई। जिलाधिकारी समीर वर्मा अपराह्न 3:50 बजे विकास भवन सभागार पहुंचे। सदस्यों ने उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस थमाया। इसके बाद महिला सदस्यों को घर भेजवाया गया। अन्य सदस्य फिर होटल पहुंचे। यहां कुछ देर रुकने के बाद अपने-अपने गंतव्य को रवाना हुए।
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प्रस्तावक, समर्थक के पाला बदलने की चर्चा
वाराणसी (ब्यूरो)। जिला पंचायत अध्यक्ष मधुकर मौर्य ने कुर्सी संभालते वक्त सोचा भी नहीं होगा कि नामांकन पत्र पर जिन लोगों ने बतौर प्रस्तावक व समर्थक हस्ताक्षर किया था, वही बुधवार को उनके खिलाफ खड़े होंगे। नोटिस देने आए सदस्यों के बीच इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि 2011 में चुनाव के दौरान मधुकर के नामांकन पत्र पर एक महिला और एक पुरुष सदस्य ने बतौर प्रस्तावक व समर्थक हस्ताक्षर किया था। हालांकि मधुकर चुनाव निर्विरोध जीत गए थे लेकिन वक्त ने करवट ली और चुनाव के दौरान के उनके प्रस्तावक व समर्थक पाला बदलकर विरोधी खेमे में पहुंच गए। इनमें से एक सदस्य को काफी मान मनौव्वल के बाद अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर के लिए राजी किया गया।

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