मत-संप्रदाय के बंधन से परे हैं कबीर

Varanasi Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
चौबेपुर। सामाजिक कुरीतियों पर खुलकर प्रहार करने वाले कबीर मत-संप्रदाय के बंधन से परे हैं। वह अपने युग से सबसे बड़े समाज सुधारक थे। उनके वचनों का अनुकरण करके ही समाजिक कुरीतियों के बंधन से मुक्ति मिल सकती है। यह बातें स्वर्वेद महामंदिर धाम में कबीर प्राकट्य महोत्सव के समापन के बाद जुटे श्रद्धालुओं को सत्संग का अमृतपान कराते हुए विहंगम योग के प्रणेता सद्गुरु स्वतंत्र देव महाराज ने कहीं। इससे पहले मंगलवार सुबह से ही सद्गुरु स्वतंत्र देव और विज्ञानदेव का आशीष पाने को भक्तों का तांता लगा रहा।
संत प्रवर विज्ञानदेव जी ने कहा कि विहंगम योग में जाति-धर्म का कोई बंधन नहीं है। इसका आधार केवल परस्पर मानवीय प्रेम है। यह प्रेम सामाजिक विसंगतियों को दूरकर सामाजिक सद्भाव की कड़ी को और मजबूत बनाता है। उन्होंने प्रदेश के अलावा झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, मणिपुर से आए भक्तों को साधुवाद दिया। भक्त ‘अ’ अंकित ध्वज लिए अपने गंतव्य को रवाना होते रहे।

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