विद्युत आपूर्ति नहीं करने में ही अफसरों की मौज

Varanasi Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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बिजली चोरी का पता लगाने से बचने को नहीं ठीक किया जाता फाल्ट
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मनमाने तरीके से प्रति किलोवाट न्यूनतम 80 यूनिट की हो रही वसूली
चोरी की बिजली का भार उठाने को मजबूर हैं उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। विद्युत उपभोक्ता परेशान हैं। भीषण गर्मी में बिजली की सर्वाधिक जरूरत और इसी समय वह सबसे ज्यादा धोखा दे रही है। कंट्रोल से रोजाना तीन से पांच घंटे की कटौती हो रही है। वैसे तमाम इलाकों में 10 से 12 घंटे की भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मामूली फाल्ट दुरुस्त करने में कर्मचारी घंटों लगा रहे हैं। उपकेंद्रों के फाल्ट तक दुरुस्त नहीं किए जा रहे हैं। दरअसल कम से कम विद्युत आपूर्ति अधिकारियों के लिए लाभदायक साबित हो रही है। लोगों की तकलीफ में ही उनकी मौज का रहस्य छुपा है।
बनारस में पिछले साल तरकरीबन पांच करोड़ यूनिट बिजली की खपत हुई। विभाग आधे से भी कम यूनिट की रकम वसूल पाया। कुछ फीडरों पर तो उपभोग की गई बिजली का महज 30 फीसदी ही वसूल हो पाया। त्वरित विद्युत सुधार एवं विकास परियोजना के तहत शहर के सभी ट्रांसफार्मरों पर ट्राई वेक्टर मीटर लगवाए गए थे। मीटरों को लगे पांच साल से भी अधिक समय हो गए लेकिन उसके हिसाब से चोरी वाले इलाकों का पता ही नहीं लगाया जाता है। नगरीय विद्युत वितरण मंडल प्रथम में लगभग 30 फीसदी लाइन लास है। अधीक्षण अभियंता एसबी पांडेय के मुताबिक अभी ट्रांसफार्मर पर लगे टीवीएम के हिसाब से बिलिंग की व्यवस्था नहीं हो पाई है। शहर के हर फीडर पर जाने वाली बिजली का हिसाब तो उपकेंद्रों से लगाया जा सकता है। उसी के हिसाब से अधिकारियों पर वसूली के लिए दबाव बनाया जाता है। इससे बचने के लिए अवर अभियंताओं और उप खंड अधिकारियों ने फाल्ट का रास्ता निकाल लिया है। बनारस में प्रत्येक उपभोक्ता से मासिक फिक्स चार्ज के अलावा नियमों को धता बताते हुए अधिकारी 80 यूनिट का न्यूनतम शुल्क लेते हैं। इसके अलावा कुछ साल पहले सभी उपभोक्ताओं के लोड बिना उनकी सहमति के बढ़ा दिए गए थे। ज्यादातर उपभोक्ताओं के कनेक्शन दो किलोवाट के हैं। वे बिजली का इस्तेमाल करें या न करें लेकिन उन्हें महीने में न्यूनतम 760 रुपये का भुगतान करना पड़ रहा है। कम बिजली देने पर चोरी करने वालों का खर्च भी उपभोक्ताओं पर डाला जा सकता है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधीक्षण अभियंता वाणिज्य पीके सिंह के मुताबिक फिक्स चार्ज के बाद केवल मीटर हुई यूनिट का ही दाम लेना चाहिए। न्यूनतम 80 यूनिट लेने का नियम नहीं है। गोरखपुर में जनता के विरोध के कारण यह रकम नहीं ली जाती है।
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