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कहीं फिर बह न जाए गंगा पर 70 करोड़

Varanasi Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। यूपी में गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने की अखिलेश यादव सरकार की पहल कितनी कारगर होगी? इस पर गहन मंथन शुरू हो गया है। युवा सीएम के पहले बजट में ‘गंगा के लिए दिए गए 70 करोड़ रुपये कितने सार्थक होंगे, गंगा एक्शन प्लान की तरह ही एक बार फिर निर्मलता के नाम पर हवाई कोशिशों से पैसा, परिश्रम और समय की बर्बादी होगी’ यह कहा नहीं जा सकता लेकिन तकनीक के अभाव में ऐसी चिंताओं ने जन्म ले लिया है। एनजीआरबीए के सदस्य जल पुरुष राजेंद्र सिंह की माने तो सिर्फ कानपुर, इलाहाबाद और बनारस में गंगा में गिरने वाले नालों को राज्य सरकार रोक ले तो इसे बहुत बड़ी सफलता के रूप में देखा जाएगा।
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अखिलेश के पहले बजट में गंगा पर 70 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा के बाद जलपुरुष ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उम्मीदें तो बहुत हैं लेकिन कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। उनकी मानें तो अभी तक औद्योगिक-घरेलू अवजल के ट्रीटमेंट के लिए कारगर तकनीक न होने से दिक्कतें रही हैं। इसके लिए नई तकनीक का सहारा लेना ही पड़ेगा। कानपुर के कचड़े की सफाई को उन्होंने बेहद कठिन बताया। उनकी मानें तो कानपुर के औद्योगिक रसायनों को शोधित करने के लिए राज्य सरकार को एक्सपर्ट राय लेने के बाद ही कदम उठाना चाहिए। वाराणसी में साड़ी की प्रिंटिंग के चलते निकलने वाले रासायनिक कचड़े को ट्रीट किया जा सकता है लेकिन इसके लिए भी मौजूदा तकनीक कारगार नहीं है। इसके लिए सरकार को पहले बायो एटीपी (एक्च्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने की सलाह उन्होंने दी है।

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