जहां तपस्या, वहीं सड़ती रही मवेशी की लाश

Varanasi Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गोमुख से गंगा सागर तक गंगा की निर्मलता के लिए मचे देशव्यापी घमासान का हश्र शनिवार को जिसने भी देखा, उसने दांतों तले उंगली दबा ली। शंकराचार्य घाट पर गंगा की अविरलता-निर्मलता के लिए तपस्या पर बैठे संतों की नाक में तब दम हो गया, जब गंगा में किनारे लगी मवेशी की लाश सड़कर बदबू करने लगी। तपस्या स्थल से चंद कदम नीचे गंगा में सड़ती लाश हटवाने में लोगों के पसीने छूट गए। गंगा को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए जिम्मेदार महकमों की उदासीनता जब तक दूर नहीं होगी, तब तक गंगा निर्मल नहीं सकती।
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लाली घाट पर सुबह ही मवेशी का शव बहकर किनारे लग गया था। गंगा किनारे सड़ती लाश से उठती दुर्गंध से तपस्वियों से लेकर राहगीरों, पर्यटकों तक की फजीहत बढ़ गई। फिर भी घाट मार्ग से गुजरने वाले नाक दबाकर किसी तरह वहां से पार हो रहे थे। जानकारी मिलने के बाद नगर निगम के अफसरों के फोन घनघनाए जाने लगे। भेलूपुर के सफाई निरीक्षक का कहना था किसी सड़े हुए मवेशी को हटाना पशुधन विभाग का काम है। फिर भी इस प्रकरण को देखा जा रहा है। घंटों बाद वहां से मवेशी का शव नाव के सहारे निकाल कर उस पार ले जाया गया तब जाकर आसपास के लोगों और पर्यटकों को राहत की सांस मिली। इस घाट पर कूड़े से भरी नाव भी दोपहर बाद तक हटाने वाला कोई नहीं था।
बयान
कहीं से बहकर मवेशी का शव सुबह लाली घाट पर किनारे लग गया था। इससे आनेजाने वालों को दिक्कत हो रही थी। तपस्या स्थल पर पहुंचने के बाद मुझे जब जानकारी मिली तो मैंने नगर आयुक्त को फोन पर सूचना दी। भेलूपुर के सफाई निरीक्षक का कहना था कि दूसरे विभाग का काम है लेकिन कुछ देर बाद शव को वहां से हटवा दिया गया। राकेश पांडेय, प्रदेश समन्वयक, गंगा सेवा अभियानम्
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