पूर्णांबा की हालत बिगड़ने से खलबली

Varanasi Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
वाराणसी। गंगा की अविरलता के लिए लगातार 24 दिन से जारी जल त्याग तपस्या साध्वी पूर्णांबा की जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है। शुक्रवार की दोपहर उनकी हालत नाजुक होने से कबीरचौरा अस्पताल प्रबंधन में खलबली मच गई। शरीर में ऐंठन और तेज कंपन से तीमारदार सकते में आ गए। पता चला कि साध्वी को राइगर हो गया है। चिकित्सकों के प्रयास से करीब घंटे भर बाद साध्वी की हालत में सुधार होने पर साधु-संतों और प्रशासन ने राहत की सांस ली।
विज्ञापन

साध्वी पूर्णांबा की हालत दोपहर करीब साढ़े 12 बजे बिगड़ने लगी। तब ड्रिप चढ़ रही थी। इमरजेंसी वार्ड के एसी रूम में साध्वी के पूरे शरीर में ऐंठन होने से ड्रिप कई बार टूटने से बची। हाथ-पैर में तेज कंपन होते देख तीमारदार डर गए। तुरंत इसकी जानकारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. डीबी सिंह को दी गई। कुछ देर में ही डा. अनुपम मिश्र, डा. अनिल श्रीवास्तव, डा. दिवाकर सिंह समेत आधा दर्जन चिकित्सक मौके पर पहुंच गए। ड्रिप बदलने के साथ ही अलग से दवा दी जाने लगी। विद्यामठ को सूचना मिली तो गंगा सेवा अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी तत्काल अस्पताल पहुंच गए। उपचार के बाद करीब घंटे भर बाद स्थिति सामान्य हो सकी लेकिन चिकित्सकों के चेहरे पर चिंता के भाव विद्यमान थे। उनका कहना था कि अगर साध्वी को जल्द उचित आहार नहीं दिया गया तो स्थिति किसी भी समय बेकाबू हो सकती है।
इनसेट
तीसरी बार राइगर की शिकायत
वाराणसी। साध्वी पूर्णांबा की नसें ढूंढने में अब दिक्कत होने लगी है। लगातार ड्रिप देने से हाथों में सूजन होने से नसें नहीं मिल रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने के बाद शुक्रवार को उन्हें तीसरी बार राइगर की शिकायत हुई। डा. डीबी सिंह के मुताबिक लगातार ड्रिप देने की एलर्जी के कारण भी राइगर हो सकता है।

इनसेट
शारदांबा की लड़खड़ाने लगी है जुबान
वाराणसी। उन्नीस दिन से निराजल रहने वाली शारदांबा की भी जुबान लड़खड़ाने लगी है। लो ब्लड प्रेशर की मरीज साध्वी की सेहत को लेकर मठ प्रबंधन चिंतित हो उठा है। तमाम आग्रह के बाद भी उन्होंने अतिरिक्त आहार लेने से मना कर दिया है।
साध्वी पूर्णांबा के तप का रिकार्ड
000
03 मई को गंगा की अविरलता की मांग को लेकर अन्न का किया त्याग
09 मई से निराजल तपस्या की शुरुआत
14 मई से हालत बिगड़ने के बाद मंडलीय अस्पताल में
000
बयान
नसें नहीं मिलेंगी तो दवा या ड्रिप नहीं दी जा सकेगी। ऐसी स्थिति में अब साध्वी को संभाल पाना मुश्किल हो जाएगा। मेरी नजर में व्रत तोड़ने के अलावा साध्वी को राहत पहुंचाने का कोई विकल्प नहीं है - डा. डीबी सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक-कबीरचौरा अस्पताल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us