ग्लूकोमा का स्थाई निदान तलाश रहे चिकित्सक

Varanasi Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। आंखाें में होने वाली ग्लूकोमा जैसी खतरनाक बीमारी के स्थाई निदान के लिए बीएचयू के चिकित्सकों की टीम शोध में जुटी है। टीम उस जीन का पता लगाने का प्रयास कर रही है जो इस बीमारी के लिए उत्तरदायी है। चिंताजनक बात यह है कि पूर्वांचल में यह बीमारी तेजी से फैल रही है।
बीएचयू नेत्र रोग विभाग के चिकित्सकाें की टीम ने अब तक के अध्ययन में पाया है कि पूर्वांचल में 40 साल से अधिक उम्र वाले अधिकांश लोगों पर इस बीमारी से पीडि़त होने का खतरा मंडरा रहा है। ओपीडी में आने वाले इस उम्र के मरीजों की इस बीमारी की जांच जरूर की जाती है। लगभग दो सौ मरीजाें पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि यह बीमारी उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य को भी थी। यह आनुवांशिक बीमारी है। नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. एमके सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम इस बीमारी का स्थाई निदान तलाश रही है। प्रो. सिंह का कहना है कि यदि उस जीन का पता लगा लिया जाए जिसकी वजह से ग्लूकोमा हुआ तो पीडि़त व्यक्ति के आंखों की रौशनी वापस लाई जा सकती है। उन्हाेंने बताया कि ग्लूकोमा में आंख की आप्टिकल नर्व (रोशनी देने वाली नस) प्रेशर के कारण तेजी से डैमेज होने लगती है। समय से उपचार नहीं होने पर व्यक्ति अंधा हो जाता है। यह बीमारी आंख में चोट लगने, मधुमेह तथा कभी-कभी अन्य प्राकृतिक कारणों से भी हो सकती है।

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