हरिद्वार से काशी तक गंगा जल विहीन

Varanasi Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गोमुख से गंगा सागर तक पतित पावनी की दुर्दशा जानने के लिए निकली इंडो-तिब्बत बार्डर पुलिस के जवानों की टुकड़ी रविवार की शाम जल मार्ग से काशी पहुंची। स्वर्ण जयंती वर्ष को यादगार बनाने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के इस साहसिक कदम की सराहना की गई। राजेंद्र प्रसाद घाट पर पहुंचे जवानों का शौर्य धुन के साथ स्वागत किया गया।
गंगा पुनर्दर्शन के तहत रीवर राफ्टिंग अभियान का नेतृत्व करने वाले डीआईजी एसएस मिश्र ने गंगा बेसिन की गंभीर समस्याओं का खुलासा करने के साथ ही तटीय बाशिंदों से उसकी रक्षा की अपील की। उन्होंने बताया कि हरिद्वार के बाद गंगा गांवों-शहरों के नालों से भरकर चौपट हो रही है। जल मार्ग से करीब 1300 किमी की दूरी तय कर पहुंचे 20 जवानों को माला पहनाकर बतौर मुख्य अतिथि आईटीबीपी के अपर महानिदेशक डॉ. महबूब आलम ने उत्साहित किया। डीआईडी एसएस मिश्र ने बताया कि हर 50 किमी पर गंगा के जल और मिट्टी के नमूने भी संकलित किए गए हैं। अब तक करीब 30 स्थानों से लिए गए पानी और मिट्टी के नूमनों को लखनऊ की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आते ही संबंधित स्थानों पर उसे चस्पा किया जाएगा। हरिद्वार से आगे हर 10 से 15 किलोमीटर पर किसी न किसी गांव, कसबा या शहर के नाले को गंगा में बहते देखा गया। कारखानों का अवजल भी धड़ल्ले से उलीचा जा रहा है। मध्य धारा में दो से तीन किमी तक काली रेखाओं की लयबद्धता देखी गई। फर्रुखाबाद से कानपुर के बीच तीन सौ से अधिक अधजले शव पाए गए। वाराणसी तक गंगा जबरदस्त ढंग से प्रदूषित हो गई है। हमें संकल्प लेना चाहिए कि किसी भी तरह का कचरा गंगा में न डालें। इस मौके पर आईटीबीपी के आईजी वीके मौर्या, आईजी जोन ब्रजभूषण, जिलाधिकारी समीर वर्मा, डीआईजी ए सतीश गणेश, एसएसपी बीडी पाल्सन उपस्थित थे। संचालन श्लेष गौतम ने किया।

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