चचेरे भाई ने रची थी गोपू की हत्या की साजिश

Varanasi Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। शादी के कई साल बाद भी जब संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. रामपूजन पांडेय के कोई संतान नहीं हुई तो उन्होंने बड़े भाई शिवपूजन के बेटे सुमित पांडेय को गोद ले लिया। उसे अपने बेटे की तरह पालने लगे। इसी बीच शादी के 12 साल बाद 1997 में सारस्वत उर्फ गोपू पैदा हुआ। इसके बाद सुमित की नीयत खराब हो गई। उसने साथियों के साथ मिलकर न केवल गोपू का अपहरण किया बल्कि उसकी हत्या भी कर दी गई। पुलिस तफ्तीश में यह हकीकत सामने आने पर सारा शहर सकते में आ गया था।
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विश्वविद्यालय परिसर स्थित आवास में रहने वाले प्रो. पांडेय का पुत्र गोपू सेंट जांस मढ़ौली में कक्षा एक का छात्र था। 16 अप्रैल 2003 की शाम वह स्कूली बस से संस्कृत विश्वविद्यालय के गेट पर उतरा। वहीं पर चचेरे भाई सुमित ने उसे बहला-फुसलाकर अपनी बाइक पर बैठा लिया। उसके साथ स्कूटर सवार दो और लोग भी थे। सुमित गोपू को लेकर फूलपुर थाना क्षेत्र के तरसड़ा स्थित मदनतारा श्मशान पहुंचा। शाम ढलने पर सुमित ने साथियों के साथ मासूम की गला दबाकर हत्या करने के बाद शव को जला दिया। घटना के दो दिन बाद गोपू का कंकाल ग्रामीणों को मिला। प्रोफेसर पिता ने दांत, हाफ पैंट के हुक और ड्रेस के अधजले टुकड़ों को देखकर अपने जिगर के टुकडे़ की शिनाख्त की। सुमित ने सोचा कि गोपू के रास्ते से हट जाने के बाद चाचा उसे फिर पहले की तरह प्यार करने लगेंगे और सारी संपत्ति उसके हाथ लग जाएगी। इसका जिक्र सुमित ने अपनी मां किरन से भी किया था। पिता इस बात के तैयार नहीं थे लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी अपने भाई को नहीं दी। सुमित ने अपने जीजा के माध्यम से राजेश कुमार सिंह और संतोष को सुपारी दी थी। घटना के खुलासे के बाद पुलिस ने सुमित के साथ उसकी मां किरन, पिता शिवपूजन पांडेय और शशिकांत चौबे को गिरफ्तार कर लिया था।
16 अप्रैल को संस्कृत विश्वविद्यालय गेट पर गोपू का अपहरण, पुलिस ने बस चालक नंदू, खलासी संतोष के साथ बस मालिक जुगल किशोर पटेरिया को हिरासत में लिया।
17 अप्रैल को तत्कालीन वीसी प्रोफेसर राजेंद्र मिश्रा ने अपहर्ताओं से मासूम की रिहाई की अपील की।
18 अप्रैल को तरसड़ा में मिला मासूम का कंकाल।
19 अप्रैल से विवि के कर्मचारी और अध्यापक आंदोलन के लिए सड़क पर उतर आए।
21 अप्रैल को घटनास्थल से तीन किलोमीटर दूर नथईपुर मार्ग पर बरामद हुआ स्कूली बैग।
22 अप्रैल को फोरेंसिक टीम ने कंकाल से मोजे और हड्डियों के अंश निकाले।
26 फरवरी 2007 को अभियुक्त सुमित, किरन, शिवपूजन पांडेय और शशिकांत को अदालत से आजीवन कारावास की सजा मिली
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