काशी में 46 जगहों पर बहने लगी उल्टी गंगा

Varanasi Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सीवर के बेखौफ बहाव ने काशी में गंगा की धारा उल्टी दिशा में फेर दी है। उत्तरवाहिनी के सात किमी लंबे किनारे पर यह अचरज आप एक-दो नहीं, 46 स्थानों पर देख सकते हैं। विपरीत दिशा में बहाव होने की दो खास वजहें सामने आई हैं। एक तो लगातार आक्सीजन की मात्रा का कम होना और दूसरा बहाव न के बराबर हो जाना। विशेषज्ञों की नजर में ऐसे स्थानों पर गंगा का जल अनुपयोगी हो गया है।
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महामना मालवीय इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालॉजी फार गंगा मैनेजमेंट की ओर से कराए गए अध्ययन में उल्टे बहाव को लेकर हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। मुक्ति तट के रूप में विख्यात मणिकर्णिका से पहले यानी अप स्टीम में कुल 46 स्थानों पर गंगा की धारा उल्टी दिशा में देखी गई है। एक लाख से अधिक रोजाना बाहर से काशी घूमने आने वाले पर्यटकों के अलावा शहरी आबादी में करीब 17 लाख लोगों को मिलाकर प्रतिदिन 450 एमएलडी अवजल का भार गंगा में जाकर दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर रहा है। जिन तटीय स्थानों पर अवजल शोधन के लिए सीवेज पंपिंग स्टेशन लगे हैं या बड़े-छोटे नालों के अलावा अंडरग्राउंड पाइप के माध्यम से घरेलू डिस्चार्ज गंगा में जा रहा है, वहां पर गंगा में अपना बहाव न होने से धारा उल्टी हो जा रही है। इसे गंगा के संकट के सबसे कठिन दौर के रूप में देखा जा रहा है।
मालवीय इंस्टीट्यूट के तकनीकी सलाहकार प्रोफेसर पद्माकर मिश्र की मानें तो नाले के जरिये जहां गंगा में अवजल गिर रहा है, वहां मौजूदा समय धारा में विलगाव क्षेत्र बन जा रहा है। यही कारण है कि अस्सी से मणिकर्णिका घाट तक गंगा किनारे जल स्थिर हो गया है। विपरीत दिशा में भी बहाव शुरू होने का यह एक अहम कारण है। इससे तटीय जल काला पड़ने लगा है। इन घाटों पर आक्सीजन की मात्रा तीन से चार पार्ट पर मिलियन रह गई है, जबकि बायोलाजिकल आस्कसीजन डिमांड बढ़कर (बीओडी लोड) आठ से 16 पार्ट पर मिलियन हो गया है। अब ऐसे किनारों पर सड़ी हुई लाशों से लेकर अन्य प्रदूषण अपने आप भंडारित होने लगेंगे।
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18 लाख से अधिक आबादी से रोजाना घरेलू डिस्चार्ज 450 एमएलडी
1 लाख से अधिक लोग पर्यटन के लिए प्रतिदिन आते हैं बाहर से
60 एमलडी प्रति किमी प्रदूषक का भार पड़ रहा है गंगा पर
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हालात से उबरने के रास्ते
-टिहरी, भीमगोड़ा जैसे बाधों से नदी के बहाव को मूल धारा में बढ़ाना
-गंगा में गिरने वाले नालों को रोककर प्रदूषण के भार को कम करना
-अस्सी नदी को पुनर्जीवित करना
-शहर के सभी तलाबों, कुंडों को मूल स्वरूप में लाना

(यह एक्सपर्ट राय गंगा प्रयोगशाला के निदेशक प्रोफेसर यूके चौधरी ने दी है)
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