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सतत शिक्षा के नाम पर लाखों का गोलमाल

Varanasi Updated Wed, 16 May 2012 12:00 PM IST
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सेवापुरी। निरक्षरों को साक्षर करने की केंद्र सरकार की योजनाओं पर सरकारी कर्मचारी ही पानी फेर रहे हैं। हाल यह है कि 2008-09 में शुरू की गई सतत शिक्षा कार्यक्रम के तहत प्रौढ़ों को साक्षर करने की योजना प्रारंभ हुई। इस बीच, योजना छह महीने ही चली कि इसे बंद करने का फरमान जारी हो गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं संबंधित समन्वयकों द्वारा साक्षरता के लिए मिले लाखों रुपये के सामानों का वारा-न्यारा कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो इस खेल में लगभग 50 लाख रुपये तक का चूना सरकार को लगाया गया।
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दरअसल, जिले के सभी 15-35 आयु वर्ग के निरक्षरों को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार ने तीन वर्ष पहले सतत शिक्षा कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके लिए बाकायदा केंद्र से जिले को लाखों रुपये धन आवंटित किया गया। इसके तहत, पूरे जिले में 1225 सतत शिक्षा केंद्र खोले गए थे, जहां 24 सौ से अधिक प्रेरक, सहायक प्रेरक और लगभग आठ ब्लाक और शहरी क्षेत्र में कोआर्डिनेटर रखे गए। बीआरसी को चार हजार मानदेय, प्रेरक को सात सौ और सहायक प्रेरक को पांच सौ रुपये मानदेय पर रखा गया था। इसके अलावा, सभी केंद्रों पर कुर्सी, मेज, लालटेन, किताब, दरी, आलमारी, वालीबाल, नेट, फुटबाल, कैरम बोर्ड समेत कई सामान भी उपलब्ध कराने थे। योजना शुरू होने के छह महीने बाद ही योजना पर ब्रेक लगा दिया गया। केंद्रों पर बांटने के लिए जो सामान खरीदे गए थे और पैसों की बंदरबांट कर ली गई। इस बारे में योजना के सचिव एवं तत्कालीन सह जिला विद्यालय निरीक्षक उदय प्रकाश मिश्र का कहना है कि योजना को बंद करने का आदेश मिलते ही जिला समन्वयक एवं ब्लाक समन्वयकों को निर्देशित कर सामान वितरण पर रोक लगा दी गई थी। इस संबंध में जिला समन्वयक सतीश श्रीवास्तव और सेवापुरी के ब्लाक समन्वयक का कहना है कि केंद्रों पर सामानों का वितरण करा दिया गया। वहीं, ब्लाक के सहयोगी समन्वयक अशोक पाठक और प्रेरक अजीत कुमार मिश्र का कहना है कि एक भी सामान का वितरण किसी भी केंद्र पर नहीं कराया गया।
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