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केंद्र के कानून का केंद्रीय संस्थाएं ही कर रहीं उल्लंघन

Varanasi Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। केंद्रीय शैक्षणिक संस्थाएं ही उड़ा रही हैं नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा कानून (आरटीई) की धज्जियां। ऐसे में निजी स्कूलों पर क्या दबाव बनेगा। यह यक्ष प्रश्न प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा से जुड़े हर किसी के दिमाग में कौंध रहा है। इसका ताजा तरीन उदाहरण सामने आया है काशी हिंदू विश्व विद्यालय से संबद्ध सेंट्रल हिंदू स्कूल का। रोक के बावजूद यहां छठवीं कक्षा में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई है। मंगलवार को इस इम्तिहान के लिए जिले में 23 केंद्र बनाए गए हैं।
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आरटीई के तहत आठवीं तक के बच्चों से न तो कोई शुल्क लिया जाना है, न दाखिले के लिए कोई प्रवेश परीक्षा होनी है। केंद्रीय मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय ने आरटीई एक्ट के तहत इसका प्रावधान किया ताकि कोई भी बच्चा कम से कम आठवीं तक की शिक्षा से वंचित न रह सके। लेकिन इसका पालन कहीं नहीं हो रहा। पब्लिक स्कूलों में तो प्रवेश परीक्षाएं हो ही रहीं हैं, अब केंद्रीय विद्यालयों ने भी आरटीई को दरकिनार कर दिया है। सेंट्रल हिंदू स्कूल गर्ल्स एवं ब्वायज में सत्र 2012-13 में कक्षा छह में दाखिले के लिए 15 मई को प्रवेश परीक्षा होनी है। इसमें कुल 13250 परीक्षार्थी शामिल होंगे। यही नहीं इसके लिए बाकायदा प्रवेश फार्म का वितरण भी किया गया, जिसका शुल्क भी सामान्य और अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए अलग-अलग निर्धारित किया गया था।


प्रवेश के लिए पंद्रह हजार आवेदन आए हैं। ऐसी स्थिति में बिना परीक्षा के चयन कर पाना बड़ा मुश्किल है। जिन कक्षाओं में संभव था लाटरी से चयन किया गया। प्रवेश परीक्षा नहीं कराने के संबंध में केंद्र से कोई गाइड लाइन नहीं आई है - मधुलिका अग्रवाल, सीएचएस बोर्ड की चेयरमैन।

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