तपस्वी वार्ड कहीं बन न जाए तपस्वी अस्पताल

Varanasi Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि जिस तरह से पुलिस प्रशासन तपस्वियों के साथ संवेदनहीनता भरा व्यवहार करने पर उतारू है। इससे तो यही लगता है कि मंडलीय अस्पताल में बना तपस्वी वार्ड को तपस्वी अस्पताल में तब्दील होते देर नहीं लगेगी। वे गुरुवार को शंकराचार्य स्थित तपस्थल पर मौजूद गंगा प्रेमियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ताज्जुब तो तब होता है जब पुलिस प्रशासन के लोग तपस्थल पर आते हैं तो उनकी बोली में शहद जैसी मिठास होती है। लेकिन उनके वहां से जाते ही लगता है कि सारी अच्छाई भी चली जाती है। लगता तो यही है कि तपस्वियों को अस्पताल पहुंचाना ही प्रशासन का मुख्य मुद्दा बन गया है। अगर वास्तव में पुलिस प्रशासन के लोग भी चाहते हैं कि गंगा की अविरलता और निर्मलता बहाल हो तो उनकी यह संवेदनहीनता खत्म होनी चाहिए। कहा कि अभी तक उनके पास तपस्या पर बैठने के लिए लोग इजाजत मांगने आ रहे हैं। लेकिन वह उन्हें यह कह कर वापस कर दे रहे हैं कि गृहस्थों की बजाय साधु संत यह जिम्मा उठा रहे है। यही ठीक है। कहा कि यह अच्छी बात है कि सामान्य जनता में मां गंगा के प्रति लगाव बढ़ता जा रहा है। साध्वी पूर्णांबा ने कहा कि गंगा की रक्षा इस देश के गौरव की रक्षा करने के समान है। गंगा सेवा अभियानम के प्रदेश समन्वयक राकेश चंद्र पांडेय ने कहा कि 15 मई को काशीवासियों की परीक्षा की घड़ी है। नगर में 17 प्रमुख स्थानों पर गंगा नाम को गुंजायमान करने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी की जा रही है। यतींद्रनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि जब तक केंद्र और गांगेय प्रदेशों की सरकारें मां गंगा के प्रति एकमत और सहमत नहीं होगी। तब तक गंगा प्रेमी अपने का छला हुआ महसूस करेंगे। इससे पूर्व तपस्या को समर्थन देने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेशपति त्रिपाठी, सतुआ बाबा, संतोष दास जी भी अपने लोगों के साथ समर्थन देने पहुंचे थे।

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साध्वी पूर्णांबा के परिजन भी पहुुंचे
वाराणसी। जल त्याग कर तपस्या कर रही साध्वी पूर्णांबा के पिता एचएल गणेश, माता श्रीमती रुक्मणी गणेश और उनके भाई भी श्रीविद्या मठ पहुंचे। माता पिता ने बेटी द्वारा की जा रही तपस्या की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। यह उनका सौभाग्य है कि उनके घर ऐसे बेटी ने जन्म लिया। कहा यह एक गौरव की बात होगी कि किसी अच्छे उद्देश्य के लिए उनकी बेटी का शरीर छूटे।
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भिक्षु की हालत गंभीर
वाराणसी। मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा में जल त्याग कर गंगा तपस्या कर रहे गंगा प्रेमी भिक्षु की हालत लगातार नाजुक होती जा रही है। विगत चार दिनों से भिक्षु ने फोर्स फीडिंग का भी विरोध करना शुरू कर दिया है। भिक्षु के तेजी से घटते वजन से अस्पताल प्रशासन चिंतित है। अस्पताल सूत्र बताते हैं कि अस्पताल की ओर से जिला प्रशासन को सूचना दे दी गई है कि भिक्षु को अब किसी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल में रखने की जरूरत है। इसे देखते हुए उन्हें अस्पताल के ही वातानुकूलित वार्ड में रखा गया है। उधर, अस्पताल में ही तपस्यारत ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद ने इच्छा जाहिर की है कि उनके पास आश्रम के बटुकों को भी रखा जाए ताकि वह उन्हें धर्मशास्त्रों का श्रवण कराते रहें।
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मेडिकल बुलेटिन
-स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
बीपी-124/80
पल्स रेट-92
वजन-85किग्रा
-स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद
बीपी-122/72
पल्सरेट-68
वजन-48 किग्रा
-गंगा प्रेमी भिक्षु
बीपी-90/60
पल्सरेट-60
वजन-30 किग्रा
-ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद
बीपी-100/68
पल्सरेट-68
वजन-44 किग्रा
-साध्वी पूर्णांबा
बीपी-120/74
पल्सरेट-78
वजन-80 किग्रा

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