ब्रह्मचारी पहुंचे अस्पताल, पूर्णांबा ने त्यागा जल

Varanasi Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गंगा सेवा अभियानम के तहत शंकराचार्य घाट पर निर्जल तपस्या करने वाले युवा तपस्वी ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियानंद को बुधवार की दोपहर करीब 2.30 बजे कबीरचौरा अस्पातल ले जाया गया। इसके साथ ही दो दिनों से चल रही जिच समाप्त हो गई। यह संभव हुआ अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पहल पर। हालांकि आज कोई हु्ज्जत नहीं हुई और तपस्वी के मान सम्मान का पूरा ख्याल रखते हुए प्रशासन उन्हें अस्पताल ले गया। ब्रह्मचारी के जाने के बाद साध्वी पूर्णांबा ने निर्जल तपस्या शुरू कर दी। अस्पताल ले जाकर ब्रह्मचारी को ग्लूकोज चढ़ाया गया और डाक्टर उनकी देखरेख में लगे रहे। उधर, गंगा प्रेमियों में प्रशासन की हरकत से जबरदस्त आक्रोश रहा। ब्रह्मचारी को देखने के लिए अस्पताल में भीड़ लगी रही।
115 घंटे तक निर्जल तपस्या करने वाले युवा तपस्वी ब्रह्मचारी कृष्ण प्रियांनद को अस्पताल ले जाने के लिए मजिस्ट्रेट, डाक्टर और इंस्पेक्टर भेलूपुर मयफोर्स दोपहर दो बजे के करीब तपस्थल पहुंचे। पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से बातचीत हुई। स्वामी जी ने पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को युवा ब्रह्मचारी के कक्ष में भेजा। वहां इंस्पेक्टर भेलूपुर ने वार्ता कर उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए राजी किया। इस बीच डाक्टरों की टीम ने कृष्ण प्रियानंद का स्वास्थ्य परीक्षण किया। हालांकि वहां मौजूद गंगा प्रेमी इससे सहमत नहीं थे। ब्रह्मचारी ने भी सुबह स्वामी जी को पत्र लिखकर अस्पताल न जाने की बात कही थी। यह भी कहा था कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और आपके अलावा किसी से बात नहीं करूंगा। आज से मौन व्रत पर जा रहा हूं। हां! प्रधानमंत्री का फोन आता है तो उन्हें चेताऊंगा जरूर। हालांकि आज वह साथी गंगा प्रेमी की गोद में लेटे एकदम निढाल दिख रहे थे। उन्हें जब स्ट्रेेचर पर सुला कर एंबुलेंस तक लाया जा रहा था तब कुछ गंगा भक्त गंगा ध्वज के साथ मां गंगा के जयकारे लगाते चल रहे थे।
युवा ब्र्रह्मचारी के गिरते स्वास्थ्य से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भावुक हो उठे थे। वह भी अस्पताल तक गए। उनके साथ सेवक दुर्गेश तिवारी, मयंक, डॉ. राकेश चंद्र पांडेय, यतींद्र नाथ चतुर्वेदी, बागीश दत्त शास्त्री, डॉ. गिरीश तिवारी, रमेश चोपड़ा समेत काफी संख्या में गंगा प्रेमी भी अस्पताल जा पहुंचे। अस्पताल में डाक्टरों ने ब्रह्मचारी का उपचार करते हुए विरोध के बाद भी उन्हें ड्रिप लगा दी। इस दौरान स्वामी सानंद महाराज और बाबा नागनाथ भी वहां मौजूद रहे।
उधर, पहले से तयशुदा संकल्प को अपनाते हुए ब्रह्मचारी के हटते ही साध्वी पूर्णांबा ने जल त्याग कर गंगा तपस्या की कमान संभाल ली। इससे पूर्व सुबह नौ बजे कृष्ण प्रियानंद की जलत्याग तपस्या के 108 घंटा पूरा होने पर 11 ब्राह्मणों द्वारा श्रीमद भागवत गीता का श्रवण पाठ कराया गया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पाठ का श्रीगणेश कराया। इसके उपरांत ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद के नेतृत्व में भूदेवों ने गीता के पाठ का क्रम आगे बढ़ाया। जो साढ़े दस बजे तक चलता रहा।

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