प्रशासन के रुख से अविमुक्तेश्वरानंद दु:खी

Varanasi Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। गंगा तपस्या में रत साधु-संतों के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट से गंगा सेवा अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काफी दुखी हैं। बुधवार की दोपहर जब डाक्टर, मजिस्ट्रेट और पुलिस फोर्स शंकराचार्य घाट पर ब्रह्मचारी कृष्णप्रियानंद को अस्पताल ले जाने को आए तो उनसे बातचीत में स्वामी जी की पीड़ा साफ झलकी। वह प्रशासन के उपेक्षात्मक रवैये से भी खिन्न दिखे।
उनका कहना था कि युवा ब्रह्मचारी की् हालत लगातार बिगड़ रही है। उसका अस्पताल जाना जरूरी है। लेकिन उसका हठ भी अपनी जगह सही है। मामला ही इतना बड़ा है। लेकिन ब्रह्मचारी के साथ गंगा भिक्षु को लेकर मैं ज्यादा चिंतित हूं। उनका वजन 36 किलो ही है और तीन दिन से उन्होंने कुछ भी नहीं लिया है। यहां तक कि दवाएं भी नहीं ले रहे। क्या करें इधर प्रशासन है कि उसे तपस्वियों से कोई सरोकार ही नहीं है। नौ मार्च से नौ मई हो गया, इस दौरान प्रशासन ने राज्य और केंद्र सरकार को क्या रिपोर्ट दी और वहां से क्या जवाब मिला इस बाबत भी कोई सूचना नहीं दी। बताया कि हरिद्वार में जब अभियान चल रहा था तो वहां क ा प्रशासन हर गतिविधि की रिपोर्ट देता रहा। वह इतने नाराज हुए कि जिलाधिकारी को पत्र लिख कर अब तक सरकार को भेजी गई रिपोर्ट और दोनों सरकारों से मिला जवाब मांगा है।


नदी-नालों से जुड़ी स्थानीय समस्या भी उठाएंगे
केंद्र का मामला कह कर नहीं बच पाएगा प्रशासन
बनाएंगे अलग विंग, जिला प्रशासन की जवाबदेही तय होगी
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। अब जिला प्रशासन यह कह कर पल्ला नहीं झाड़ पाएगा कि गंगा मुक्ति अभियान का जिला स्तर से कुछ नहीं होने वाला, यह तो केंद्र सरकार का मामला है। गंगा सेवा अभियानम् इसका इंतजाम भी कर रहा है। अभियानम् के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि गंगा और नदियों के प्रदूषण, उनमें गिरते नालों के अवजल तथा पर्यावरण प्रदूषण जैसे मुद्दों को उठाने के लिए अभियानम् का एक अलग विंग बना कर जिला प्रशासन की जवाबदेही तय की जाएगी। इसमें कुछ और मुद्दे भी जोड़े जाएंगे। क्या-क्या मुद्दा हो सकता है इस पर विचार चल रहा है, जल्द ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक नगरी काशी के प्रति देश विदेश में रहने वालों में जो आस्था भाव है वह उनके यहां आने पर भी कायम रहे इसके लिए स्थानीय मुद्दों को उठा कर आंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने इलाहाबाद का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अभियानम् ने गंगा-यमुना संगम में गिरने वाले नालों को रोका। गंदे पानी के शोधन का काम हमारे लोग कर रहे हैं। अब वहां गंदा पानी गंगा जल में नहीं जाता। हम चाहते हैं यहां भी वह काम शुरू क रें। गंगा पर बांध का मामला नहीं होता तो यह कार्य शुरू कर चुके होते।

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