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समस्याओं के मकड़जाल में फंसी विश्व की सांस्कृतिक नगरी काशी

Varanasi Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। विश्व की प्रसिद्ध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक नगरी होने के बाद भी बनारस मूलभूत समस्याओं से उबर नहीं पाया है। आज भी शहर की सड़कें, सीवेज, यातायात और पेयजल व्यवस्थाएं पूरी तरह से ध्वस्त हैं। हाल यह है कि शहर की सीवेज लाइन जाम है तो सड़कों पर चलना मुश्किल। जो कुछ व्यवस्था ठीक भी है तो जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी विकास योजना के तहत विकास के नाम पर पूरे शहर की एक साथ शुरू हुई खोदाई ने ध्वस्त कर दिया। पर्यटन की दृष्टि से विश्व पटल पर अलग पहचान बनाने वाले बनारस का विकास जिस गति से होना चाहिए, नहीं हुआ। हर साल यहां लाखों की संख्या में देशी-विदेशी सैलानियों का आना-जाना होता है। ऐसा नहीं कि शहर के विकास केलिए जिला प्रशासन-शासन या फिर केंद्र सरकार ने योजनाएं नहीं बनाईं। हुआ सब कुछ, पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होने के कारण बनारस आज भी मूलभूत सुविधाओं के ऐसे मकड़जाल में फंसा है कि जल्दी निकल पाएगा, मुश्किल लगता है। चुनौती है बनारस के शैक्षिक, सांस्कृतिक, धार्मिक महत्व को कायम रखने तथा मूलभूत सुविधाओं यथा शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात, बिजली, पानी मुहैया कराने के साथ ही दिल्ली एवं लखनऊ जैसे शहरों की तर्ज पर पर्यटन को बढ़ावा देने की। शहर को विकसित करने की पहल की है चंदौली के सपा सांसद रामकिशुन यादव ने। उन्होंने संसद में बनारस की बदहाली को बयां कर इसके विकास केलिए दस हजार करोड़ रुपये से अधिक की मांग की है। साथ ही प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उस मांग का भी समर्थन किया है जिसमें बनारस के विकास के लिए केंद्र सरकार से धन की मांग की गई है। सांसद की मानें तो इतनी कम रकम में बनारस को असली स्वरूप में लौटा पाना संभव नहीं होगा और यदि मांगी गई राशि मिल गई तो बनारस वाकई अपने मूल स्वरूप में लौट आएगा और यहां एक बार आने वाले सैलानियों से कहेगा - फिर जल्दी आना !!!
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हमें चाहिए ओवरब्रिज
पुरातन शहर होने के कारण काशी की सड़कें काफी संकरी हैं। जिसके चलते यहां यातायात की समस्या काफी लंबे समय से है। इसके लिए कज्जाकपुरा और आशापुर में रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज की आवश्यकता है। छावनी क्षेत्र में करियप्पा मार्ग बंद होने से आम जनता को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

बारिश में डूबने से बचाओ
शहर के कई ऐसे बुनकर इलाके हैं, जो बारिश में पूरी तरह से डूब जाते हैं। इन क्षेत्राें में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण गंभीर बीमारी और लोगों के सामने रहने का संकट खड़ा हो जाता है।

अंधरापुल को चौड़ा करो
अंधरापुल के चौड़ीकरण का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार केपास भेजा गया है। पता नहीं इस पर अमल कब होगा?

विदेशी सैलानियों का तो ख्याल करो
गंगा-जमुनी तहजीब के शहर बनारस में विदेशी सैलानियों का रेला लगा रहता है। बनारस पूर्वांचल का एक महत्वपूर्ण केंद्र है लेकिन ध्वस्त सड़कें, फैली गंदगी, सड़कों-गलियों में बहते सीवर से इस शहर की छवि तो धूमिल होती ही है, पर्यटन की दृष्टि से होने वाले आर्थिक लाभ का अपेक्षानुरूप लाभ भी नहीं मिल पाता।

नदियों पर कई और चाहिए पुल
बनारस को विकसित करने की जरूरत है। जरूरत है दिल्ली और लखनऊ की तरह जगह-जगह नदियों पर पुल और ओवर ब्रिजों का निर्माण कर शहर की जाम की समस्या से निजात दिलाने की। सीवर, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य के संकट से भी बनारस को उबारने की जरूरत है।


मुंह बाए खड़ी हैं समस्याएं
पेयजल
बनारस में पेयजल की समस्या लंबे समय से है। शहर केपक्के महाल में ऊंचे इलाकों में गर्मी केदिनों में पानी दूसरी-तीसरी मंजिल पर नहीं चढ़ पाता।
बिजली
बिजली यहां के लिए एक गंभीर समस्या है। जिला प्रशासन, बिजली विभाग और शासन तक आश्वासन मिलने के बाद भी शहरियों को भरपूर बिजली नहीं मिल पाती। सुबह शाम पानी के लिए लोग तरस जाते हैं।
सीवर
शहर में सीवर का बुरा हाल है। शहर के हर गली मे सीवर लाइन चोक है। ढक्कन गायब हैं। नगर निगम की साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है।

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