संघर्ष की राह पर और ऊर्जावान दिखे सानंद

Varanasi Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। अविरल-निर्मल गंगा के लिए बुधवार की रात शंकराचार्य घाट पर शुरू निर्जल तपस्या दूसरे दिन भी जारी रही। यूं कहें कि इस दौरान स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद बिना अन्न-जल के भी संघर्ष की राह पर और ऊर्जावान दिख रहे थे। इस बीच गुरुवार को शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की शिष्या साध्वी पूर्णांबा भी अन्न का परित्याग कर अनशन पर बैठ गईं।
तपस्या स्थल पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि 23 मार्च को गंगा के मसले पर जारी तपस्या के दौरान केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बांधों पर काम रोकने का समझौता हुआ था। ऐसे में तपस्या पर नरमी बरतकर हमने सरकार का सहयोग करने का रुख स्पष्ट किया लेकिन सरकार ने बांधों पर काम जारी रखकर समझौते को तोड़ दिया। सिर्फ पीपलकोठी परियोजना जो अलकनंदा पर बन रही है उसे रोकने की जानकारी दी जाती रही। प्रधानमंत्री ने 17 अप्रैल की एनजीआरबीए की बैठक में कहा था कि स्वामी सानंद एम्स से नहीं आ सके हैं, उनसे बात कर जल्द ही अविरलता-निर्मलता पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। 27 अप्रैल तक सानंद दिल्ली में ही थे उन्होंने पीएम को पत्र भेकर अपनी दिल्ली में मौजूदगी की जानकारी भी दी लेकिन न उन्होंने बात की और न मुलाकात। अभियानम के लोग सार्थक बात होने की दशा में गंगा मुक्ति महा महोत्सव का तोहफा पाने को भी तैयार थे और गंगा महा मुक्ति संग्राम के लिए मैदान में उतरने के लिए भी। अंतत: तोहफा धोखा साबित हुआ और अब महासंग्राम के लिए हम उतर चुके हैं। हम सिर्फ गंगा की मुक्ति चाहते हैं। गंगा अविरल-निर्मल हो जाए, बस। अगर किसी तपस्वी को गिरफ्तार किया गया तो भी कानून को हाथ में नहीं लेंगे। तपस्वियों की लंबी सूची है।
तपस्या स्थल पर गुरुवार को मैगसायसाय पुरस्कार विजेता जल पुरुष राजेंद्र सिंह, केंद्रीय देव दीपावली महासमिति के अध्यक्ष पं. वागीश दत्त मिश्र, रमेश चोपड़ा, प्रमोद माझी, साध्वी शारदांबा, अभियानम के प्रदेश संयोजक राकेश पांडेय, यतींद्र नाथ समेत अभियान से जुड़े प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। शंकराचार्य वेद महाविद्यालय के बटुकों की टोली गंगा मुक्ति के ध्वज के साथ घाट की सीढि़यों पर गगनभेदी जयकारे लगाती रही।

Spotlight

Most Read

Budaun

संरक्षित स्मारक रोजा को मजहबी रंग देने की कोशिश

संरक्षित स्मारक रोजा को मजहबी रंग देने की कोशिश

21 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: श्रीलंका का ये सांस्कृतिक नृत्य देख कर झूम उठेंगे आप

बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय के पंडित ओंकार नाथ ठाकुर सभागार में गुरुवार की शाम श्रीलंकाई कलाकारों के नाम रही। यहां श्रीलंका से आए 10 कलाकारों के ‘ठुरैया ग्रुप’ ने पारंपरिक नृत्य से समां बांध दिया।

20 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper