ओवरब्रिज युक्त बनेगा बीएचयू अस्पताल

Varanasi Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के सर सुंदरलाल चिकित्सालय को विश्वस्तरीय बनाने की तैयारी है। स्थापना स्थल पर एयर एंबुलेंस सेवा युक्त अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर तो बन ही रहा है। परिसर के पश्चिमी हिस्से में बुजुर्गो की देखभाल के लिए जेरियाट्रिक सेंटर भी तैयार हो रहा है। इसी के पास नया कैंसर अस्पताल बनेगा। यहीं से एक काफी चौड़ा ओवरब्रिज सुंदर बगिया तक जाएगा। जहां सुपर स्पेशियालिटी चिकित्सकीय सेवाओं (न्यूरोलाजी, कार्डियोलाजी, यूरोलाजी आदि) के अलावा प्रस्तावित केंद्रीयकृत इंस्टीट्यूट आफ ट्रांसलेशनल रिसर्च होगा। इस ओवरब्रिज पर चाय-नास्ते के लिए आरामदायक कार्नर भी होंगे।
नए स्वरूप में विस्तार पाने पर इस अस्पताल का लुक ह्यूस्टन टेक्सास मेडिकल सेंटर जैसा होगा। अमर उजाला से खास बातचीत में विश्वविद्यालय की इस महत्वाकांक्षी योजना की जानकारी कुलपति पद्मश्री डा. लालजी सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि लक्ष्य पूर्वांचल और यूपी के जरूरतमंद आम लोगों को गंभीर से गंभीर मर्ज का विश्वस्तरीय चिकित्सकीय संस्थानों की भांति बहुआयामी उपचार एक ही परिसर में उपलब्ध कराना है और वह भी किफायती शुल्क पर। कैंसर अस्पताल में उपचार के सभी विशेषज्ञता वाले विभाग होंगे। इस पूरी योजना पर गंभीरता से पहल हो रही है। सबसे पहले सुंदर बगिया को अनधिकृत कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। उसके बाद वहां प्रस्तावित निर्माण योजनाबद्ध ढंग से शुरू होंगे। इसके मूर्त रूप लेते ही मूल अस्पताल में सामान्य रोग वाले मरीजों के उपचार के लिए ज्यादा स्थान उपलब्ध हो जाएगा। टीबी मरीजों के लिए 90 बेड का एक अतिरिक्त वार्ड और इमरजेंसी की क्षमता बढ़ाने के लिए तीन मंजिला भवन बनाने की योजना बन चुकी है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने दृढ़ता से कहा कि अतीत में महामना की सोच के अनुरूप परिसर की हरियाली छटा वाले स्वरूप सरीखे ही सभी निर्माण कार्य होंगे। पिछले कार्यकाल में मैदानों और हरियाली को खत्म कर जितने भी भवन निर्माण योजनाओं को मंजूरी दी गई थी, उन्हें रद कर दिया गया है। अब जितने भी जरूरी निर्माण कार्य होंगे, वह वर्टिकल आकार में यानी ऊंचाई में बहुमंजिली भवनों के रूप में होंगे। ये निर्माण भी परिसर के बीच नहीं बल्कि बाउंड्री वाल के किनारे होंगे। छह-छह एकड़ में फैले प्राध्यापक आवास की बजाय सीमित जगह पर अत्याधुनिक विश्वस्तरीय सुविधाओं युक्त औसतन 10 - 10 मंजिले भवन होंगे। हर भवन के आसपास पर्याप्त हरियाली के लिहाज से समुचित संख्या में पौधरोपण होगा। इसके लिए माडल रूप में एक भवन डाकघर के पास बनाने की योजना क्रियान्वित की जा रही है।


माडल होगा इंस्टीट्यूट आफ ट्रांसलेशनल रिसर्च
वाराणसी। इंस्टीट्यूट आफ ट्रांसलेशनल रिसर्च के स्थापित होने के बाद बीएचयू चिकित्सा सेवाओं में देश और दुनिया में पथ प्रदर्शक की भूमिका में उभर सकेगा। कुलपति पद्मश्री डा. लालजी सिंह के अनुसार, विश्वविद्यालय में आईआईटी होने के बाद विशेषज्ञ प्राध्यापकों के साथ ही गुणवत्तापूर्ण शोध और विद्यार्थी भी उभरेंगे। वह चिकित्सकीय सेवाओं से जुड़े लोगों के साथ शोध करेंगे तो हर छोटी-बड़ी जरूरत का सरल-सस्ता और टिकाऊ निदान देने की योजना पर त्वरित काम होगा। इसका सीधा लाभ आम आदमी को मिलेगा जो कि बीएचयू की स्थापना को लेकर महामना की सोच भी थी।

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