बीएचयू अस्पताल को उच्चीकृत कर बना सकते हैं एम्स

Varanasi Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। नए एम्स के निर्माण की राह मुश्किल है पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर स्थित सरसुंदर लाल चिकित्सालय को उच्चीकृत कर इसे ही एम्स का दर्जा दिया जा सकता है। इसमें बहुत कठिनाई नहीं आएगी। यह कहना है कुलपति डा. लालजी सिंह का। मंगलवार को सर सुंदरलाल चिकित्सालय के सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में अत्याधुनिक सुविधायुक्त 18 बेड और अल्ट्रा माडर्न चिकित्सा सेवा का शुभारंभ उन्होंने किया।
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डा. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रणाली में सर सुंदरलाल चिकित्सालय देश में अद्वितीय है। इसे बेहतर उच्चीकृत सुविधाएं देकर एम्स का दर्जा दिया जाना आसान है। इसीलिए इसे यह दर्जा दिलाने को केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया गया है और उसे स्वीकृत कराने का प्रयास जारी है। कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत महत्वाकांक्षी कार्यसूची को लागू करने की तैयारी है। इससे पहले, आईसीयू इंचार्ज और एनेस्थेशिया विभागाध्यक्ष प्रो. डीके सिंह ने बताया कि यूनिट में लगाए गए 18 अत्याधुनिक बेड मरीजों को स्वत: हिलाने-डुलाने में इस तरह से सक्षम हैं, जिससे लंबी अवधि तक बिस्तर पर पड़े रहने पर भी मरीज को बेडशोर नहीं होगा। कहा कि यहां के आईसीयू में औसतन सालाना 12 सौ मरीज भर्ती होते हैं। इसमें से करीब 60 फीसदी पूरी तरह स्वस्थ होकर जाते हैं। आईसीयू में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा शुरू करने के लिए आयोजित कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापन डा. एपी सिंह ने किया। इस दौरान चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्रभारी निदेशक प्रो. मांडवी सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. वीके कुमरा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. यूएस द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. कुंदन सिन्हा, उप चिकित्सा अधीक्षक डा. आनंद श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
बीएचयू परिधि में ही रहेगा आईआईटी : डा. लालजी सिंह
वाराणसी। कुलपति डा. लालजी सिंह ने बीएचयू के आईटी को आईआईटी का दर्जा देने संबंधी बिल के लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने पर कतिपय लोगों की आशंकाओं को खारिज किया है। उन्होंने कहा है कि आईआईटी विश्वविद्यालय परिधि में रहेगा। अब दुनिया और देश के सामने इसे माडल रूप में पेश करने की चुनौती होगी। कारण यह पहला आईआईटी होगा, जो एक विश्वविद्यालय परिसर में संचालित होगा, जहां पहले से चिकित्सा, विज्ञान और अन्य विधाओं के अध्ययन की सुविधा है। ऐसे में इन सब के साथ मिलकर काम होगा तो तरक्की का नया अध्याय रचा जा सकेगा।
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