बीएचयू आईआईटी बिल राज्यसभा में पारित होने पर विवि परिसर चहका

Varanasi Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। आखिरकार काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटी) को आईआईटी बनाने संबंधी बिल सोमवार को राज्यसभा में भी पारित हो गया। इसकी सूचना मिलते ही पूरा विश्वविद्यालय परिसर जश्न में डूब गया। आइटियंस को तो मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई। ऐसा हो भी क्यों न, वे इसके लिए पांच साल से संघर्षरत हैं। कुलपति पद्मश्री डा. लालजी सिंह भी इससे अछूते नहीं रहे। बधाई देने पहुंचे प्राध्यापकों का उन्होंने मुंह मीठा कराया और इस उपलब्धि को पूर्वांचल के लिए मील का पत्थर बताया। मोरवी, राजपूताना आदि आइटियंस के हास्टलों से लेकर संस्थान के निदेशक कार्यालय और विभागों तक में मानो जश्न का माहौल था।
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बता दें कि देश में नए आईआईटी बनाने के क्रम में केंद्र सरकार ने बीएचयू आईटी को भी आंका था लेकिन चार फरवरी 2009 को जब सरकार के स्तर पर यहां के आईटी को यह दर्जा न देने संबंधी जानकारी मिली तो सात फरवरी को आइटियंस उबल पड़े थे। उनका कहना था कि वर्ष 2008 में यहां इसी सपने के साथ दाखिला लिया था कि आईआईटी की डिग्री मिलेगी। उसके बाद छात्र परिसर में ही सड़कों पर उतरे और लंका-रविदास गेट पर भी मार्च किया। करीब हजार की संख्या में छात्र दिल्ली पहुंचे और वहां विभिन्न मंत्रालयों के अलावा हर राजनीतिक दल के प्रमुख नेताओं से मिले। तत्कालीन आईटी निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय, प्रो. बीबी बंसल, डा. पीके मिश्रा, प्रो. एनके मुखोपाध्याय समेत सभी प्राध्यापकों ने छात्रों की मांग को जायज बताते हुए पहल की। इसके बाद कुलपति के स्तर पर नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार के पास भेजा गया। तब 24 मार्च 2011 को लोकसभा ने तो बीएचयू आईटी को आईआईटी बनाने का बिल पारित कर दिया पर राज्यसभा में यह बिल अब तक लंबित पड़ा था। राज्यसभा में बिल को पारित कराने के लिए छात्रों ने जनवरी 2012 से लगातार आंदोलन-अभियान चला रखा था। पूर्व छात्र गौरव गर्ग, आलोक कुमार और हरमनप्रीत सिंह आदि के नेतृत्व में छात्रों ने संकटमोचन मंदिर जाकर प्रार्थना की। साथ ही, आईआईटी बनाने का विरोध करने वालों को भी समझाने की कोशिश की। उन्हें बताया कि आईआईटी बनने से बीएचयू खंडित नहीं होगा। अब जब राज्यसभा ने भी इस बिल को पारित कर दिया तो खुशी से झूमते आइटियंस ने दूसरे संस्थान और संकाय के विद्यार्थियों के साथ इस उपलब्धि की खुशियां बांटीं।
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