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फोन लगेगा फटाफट, सर्फिगिं होगी सुपरफास्ट

Varanasi Updated Thu, 06 Nov 2014 05:30 AM IST
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अजय राय
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वाराणसी। ‘भाई साहब नहीं लगेगा।’ इंटरनेट की सुस्त रफ्तारी और काल ड्रॉपिंग से परेशान युवाओं ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को यह नाम दिया है। कंपनी अपनी इस छवि को जल्द ही बदलने जा रहा है। मोबाइल कॉल और डाटा सर्फिगिं के लिए निगम ऐसा हाईवे बना जा रहा है, जिस पर ट्रैफिक कभी रुकेगा नहीं। न फोन लगने में दिक्कत होगी और न काल ड्रॉप होगी। इसके लिए मास्टर स्विचिंग कंट्रोल (एमएससी) और बीटीएस (टावरों) पर अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं। परीक्षण के दौर में ही इस तकनीक के बेहतर नतीजे दिखाई देने लगे हैं और इंटरनेट सर्फिगिं की रफ्तार बढ़ गई है। बनारस के अलावा लखनऊ, कानपुर में भी इसी तरह के उपकरण लगाए जा रहे हैं।
युवाओं को सबसे अधिक परेशानी इस बात से होती है कि शहर में एक दर्जन इलाकों में बैटरी कमजोर होने के कारण बिजली कटते ही कॉल ड्रॉप हो जाया करती है। दिक्कत तो इस बात की भी है कि कंपनी ने अपने सभी इंटरनेट डाटा पैकेज लेने वालों से थ्री जी सेवा की कीमतें वसूलनी शुरू कर दी हैं जबकि जिले के 453 मोबाइल टावरों में महज 143 ही थ्री जी टावर (बीटीएस) हैं, जो शहरी इलाकों को ही कवर करते हैं। इस तरह न तो कालें ठीक से हो पाती हैं और न ही बेहतर डाटा सेवा ही लोगों को मिल पा रही है। ग्रामीण इलाकों में तो थ्री जी सेवा लगभग ठप ही हो जाती है। फास्ट सर्फिगिं और सदैव आनलाइन रहने वाले युवाओं इससे खीझते रहते हैं और आजिज आकर बीएसएनएल से किनारा करने लगे थे। ऐसे में मजबूरन अब कंपनी अपने एमएससी और बीएससी का सिस्टम ही बदल रही है।
मौजूदा एरिक्शन की तकनीक में किसी की काल लगते ही एक लाइन व्यस्त हो जाती है। उसकी जगह अब जेडटीई की तकनीक के उपकरण लगाए जा रहे हैं, जिसमें कालें इंटरनेट प्रोटोकाल (आईपी) प्लेटफार्म पर भेजी जाती हैं। आईपी प्लेटफार्म पर एक ही लाइन पर एक के बाद एक कई कॉल भेजी जा सकती हैं, जिससे युवाओं को नेटवर्क जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी। इसके अलावा इस प्रणाली में बिजली की खपत कम होने के कारण बैटरी बैकअप की भी समस्या नहीं होगी। इस तरह नई तकनीक में वॉयस कॉल ही आसानी से नहीं होंगी बल्कि इंटरनेट सर्फिगिं भी फास्ट हो जाएगी। कंपनी टावरों (बेस ट्रांस सिस्टम) की भी क्षमता बढ़ा रहा है। अब तक 900 बैंड पर चलने वाले उपकरणों को 1800 बैंड पर ट्यून किया जा रहा है। लंका, गोदौलिया, पांडेयपुर, अर्दली बाजारमें ऐसे 18 बीटीएस तैयार हो गए हैं। इससे नेट यूज करने वाली नई पीढ़ी को खासी राहत मिलेगी।

कोट
नए उपकरणों की टेस्टिंग शुरू हो गई है। इससे इंटरनेट की स्पीड बढ़ी है। युवा रात में दो से चार बजे तक सबसे ज्यादा इंटरनेट सर्फिगिं कर रहे हैं। पहले इस अवधि में मुश्किल से थ्री जी नेटवर्क पर भी एक एमबीपीएस की स्पीड मिलती थी जो अब तीन एमबीपीएस तक हो गई है। नई तकनीक से इंटरनेट की बैंड विथ इतनी हो जाएगी कि ऑन डिमांड स्पीड मुहैया कराना संभव हो जाएगा। -आरएस पांडेय, महाप्रबंधक (मोबाइल)
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एक साथ बात करेंगे सवा लाख लोग
बनारस शहर के लिए 5000 चैनल की एमएससी लगी है। इससे एक साथ 80 हजार कॉल होती हैं। नई एमएससी की क्षमता 8000 चैनल की है, जिससे एक लाख 28 हजार कॉल एक साथ होंगी। इसके अलावा नए सिस्टम के आईपी प्लेटफार्म पर काम करने की वजह एक ही लाइन पर एक के बाद एक कई कॉल भेजी जा सकती हैं, लिहाजा नेटवर्क जाम और कॉल ड्राप से निजात मिलेगी। नई तकनीक में बिजली की भी कम खपत होती है, जिससे नेटवर्क में गड़बड़ी कम आएगी।
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