सियासी गरमाहट को लस्सी और ठंडई से राहत

Varanasi Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ती जा रही है, बनारस में सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है। आठ चरण के मतदान पूरे होने के बाद अब सभी दलों के शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अंतिम चरण में पूर्वांचल में होने वाले मतदान पर केंद्रित हो गया है। भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, सपा और बसपा के कार्यकर्ता पूरी तन्मयता से अपने प्रत्याशी के प्रचार में जुटे हुए हैं। सुबह से देर रात तक शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार अभियान में जुटे कार्यकर्ता खाने-पीने में पसंद क्या कर रहे हैं, इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि चाहे किसी भी दल के नेता या कार्यकर्ता हों, उन्हें सबसे अधिक भा रही है बनारसी लस्सी और ठंडई। इस चटकती गर्मी में ये पेय ही उन्हें राहत पहुंचा रहे हैं।
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(कांग्रेस)
बनारसी कचौड़ी का स्वाद लेकर कांग्रेसी कर रहे प्रचार
वाराणसी। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय के पक्ष में प्रचार के लिए बाहर से यहां आए पार्टी के वरिष्ठ नेता बड़े होटलों में रुककर लंच लेने के बाद निकल रहे हैं। गुजरात तथा देश के अन्य हिस्सों से आए छोटे पार्टी नेता सुबह बनारसी कचौड़ी व सब्जी का स्वाद चख कर प्रचार के लिए निकल रहे हैं। प्रचार व अन्य कार्यों में जुटे पार्टी नेता व कार्यकर्ता भी सादे भोजन पर ही जोर दे रहे हैं। उन्हीं के हिसाब से कार्यकर्ताओं व बाहर से आए नेताओं के लिए सुबह कचौड़ी-सब्जी और दोपहर में चावल, दाल, रोटी और सब्जी बनाई जा रही है। दो-तीन दिन के अंतराल में पूरी भी बनवाकर खिलाई जा रही है।
पार्टी ने बड़े नेताओं गुलाम नबी आजाद, अविनाश पांडेय, मुकुल वासनिक, भक्त चरण दास, नगमा, राज बब्बर, करुणा शुक्ला, श्रीप्रकाश जायसवाल आदि के लिए होटल ताज तथा रीजेंसी में ठहरने की व्यवस्था की है। इन होटलों में ठहरे नेता अपने हिसाब से ब्रेकफास्ट व लंच ले रहे हैं। पार्टी नेता बड़े नेताओं के लिए सिर्फ उनके ठहरने की व्यवस्था की तरफ ध्यान दे रहे हैं। गुजरात से राष्ट्रीय छात्र संगठन तथा मथुरा से भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की टीम यहां पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार के लिए आई है। गुजरात तथा मथुरा से आई टीम के रुकने की व्यवस्था गोदौलिया व कैंट स्टेशन के पास स्थित धर्मशालाओं में की गई है। यहां ठहरने वाले पार्टी नेता व कार्यकर्ता सुबह के नाश्ते में बनारसी कचौड़ी व सब्जी का सेवन करके प्रचार में निकल रहे हैं।वहीं नदेसर स्थित एक रेस्टोरेंट से उनकी इच्छा के अनुरूप लंच पैकेट भी भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा सिगरा स्थित केंद्रीय चुनाव कार्यालय से भी इनके नाश्ते व लंच की व्यवस्था की जा रही है। यहां सुबह के नाश्ते में पूरी सब्जी और लंच के लिए चावल, दाल, रोटी और सब्जी बनाई जा रही है। खान-पान की पूरी व्यवस्था कांग्रेस प्रत्याशी के एक खास व्यक्ति संभाल रहे हैं। प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोगों के नाश्ते व लंच की व्यवस्था की जा रही है।

(समाजवादी पार्टी)
आगंतुकों के लिए मिठाई का इंतजाम
समाजवादी पार्टी के ज्यादातर कार्यकर्ता स्थानीय है। चार-पांच लोग ही चुनाव कार्यालय में रहते हैं। दफ्तर में कोई रसोई घर नहीं है। दिन में आने वाले कार्यकर्ताओं के स्वागत के लिए मिठाई का इंतजाम रहता है जबकि समर्थक, चालक आदि के खाने का प्रबंध होटल में किया गया है।

(आम आदमी पार्टी)
मास्टर जी बना रहे कार्यकर्ताआें का ‘मिड-डे मील’
वाराणसी। देश के कोने-कोने से आए आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता बनारसी स्वाद का जमकर आनंद लेते देखे जा रहे हैं। सुबह जहां कचौड़ी-सब्जी की दुकानों पर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट रही है तो शाम को वे शुद्ध बनारसी भोजन चख रहे हैं। प्रचार के दौरान ठंडई व लस्सी का स्वाद लेना कार्यकर्ता नहीं भूल रहे हैं। सिगरा में स्थित पार्टी कार्यालय पर सौ कार्यकर्ताओं के लिए भोजन तैयार हो रहा है। हरियाणा से आए शिक्षक व उनकी टीम सब्जी काटने से लेकर खाना पकाने तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही है। वहीं स्थानीय महिलाएं भी उनका सहयोग कर रही हैं। दूसरी तरफ पार्टी के लोकसभा कार्यालय के रसोईंघर में सत्तू, मैगी व खाद्य सामग्रियां रखी हुई है। जिस वालंटियर को जो जरूरत होती है वह अपनी सुविधा व दक्षता के आधार पर पका रहा है। ज्यादातर कार्यकर्ता पार्टी समर्थकों के यहां ठहरे है और वहीं भोजन कर रहे हैं। दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े नेताआें के साथ प्रचार में जुटे कार्यकर्ता बाटी-चोखे का स्वाद चख रहे हैं।

(भारतीय जनता पार्टी)
भाजपा कार्यकर्ता चख रहे काशी का जायका
वाराणसी (ब्यूरो)। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के लिए स्थानीय कार्यकर्ता तो चुनावी समर में डटे ही हैं, दूसरे प्रदेशों के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की भी बड़ी फौज इन दिनों बनारस में है। पार्टी से जुड़े बड़े नेताओं ने बड़े होटलों में डेरा डाल रखा है। वहीं, गुजरात से आने वाले कार्यकर्ता और व्यवसायी चौखंभा इलाके में बसे गुजराती समाज के परिवारों में और धर्मशालाओं में टिके हुए हैं। पार्टी के रथयात्रा स्थित केंद्रीय चुनाव कार्यालय भी वालंटियर्स और नेताओं से अटा पड़ा है। इनका भोजन कार्यालय में ही तैयार होता है। कार्यालय में सुबह चने की घुघरी और दोपहर में पूड़ी-सब्जी बांटी जाती है। किचन की व्यवस्था के लिए बाहरी खानसामा बुलाए गए हैं लेकिन पार्टी के नेता उन्हें कार्यकर्ता ही बताते हैं। जो कार्यकर्ता अपने मित्रों-रिश्तेदारों के यहां रुके हैं, वह सुबह का नाश्ता तो उनके घरों पर ही कर रहे हैं लेकिन जब वे दिन में जनसंपर्क के बाद बाहर निकलते हैं तो बनारसी कचौड़ी-जलेबी का स्वाद जरूर लेते हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी तादाद में कैंप कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाटी-चोखा का स्वाद खूब भा रहा है।
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