घर से घाट तक के रिश्तों का वास्ता

Varanasi Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। सुबह 8 बजे। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय घर से निकलते हैं। जाना है राजातालाब मंडी। किसी का फोन भी आता है.....जवाब देते हैं, बस दस मिनट में पहुंच रहा हूं। पर चंद कदमों पर कुछ जाने-पहचाने चेहरे गाड़ी रोक लेते हैं। किसी और से मिलने की बजाय पहले शरद बहार (दूध, लस्सी की दुकान) दुकान में घुसते हैं, मालिक से पुरानी दुआ सलाम है। हाथ मिलाते हैं हाल-चाल पूछते हैं, पर वोट की बात नहीं करते। दुकान से बाहर निकलते हैं कि कई लोग घेर लेते हैं। सवाल भी अलग-अलग, जवाब भी अलग-अलग। काफिला आगे बढ़ता है, राजातालाब सब्जी मंडी की तरफ। इस बीच किसी न्यूज चैनल वाले का फोन आता है, समय मांगा जाता है। पर मजबूरी बताते हैं कि वाराणसी में कई बड़े नेता मौजूद हैं, उनको बुला लें, खुद तो प्रचार में व्यस्त हैं। इस समय पल-पल कीमती है।
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गाड़ी में सरसरी निगाह से अखबार की सुर्खियां देखते हैं। पर नजर गड़ाते हैं अपने मतलब वाली खबरों पर। तब तक गाड़ी राजातालाब पहुंच जाती है। पहले से मौजूद कचनार के ग्राम प्रधान राजकुमार जायसवाल अगवानी के लिए मौजूद रहते हैं। बिना किसी औपचारिकता के सब्जी मंडी के अन्दर जाते हैं। राय घुसने के साथ अंगौछा सिर पर बांधते हैं, और पैजामा थोड़ा ऊंचा करते हैं, क्योंकि मंडी में अंदर जाने के लिए कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। किसी से हाथ मिलाते हैं, किसी के सिर पर हाथ फेरते हैं, महिलाओं से हाथ जोड़ते ंहैं। बगल के गांव से सब्जी लाने वाला रामगुलाम कहता है मंडी में कोई नेता पहली बार आया है, शायद इसकी गंदगी दूर हो जाए। मिलते-मिलाते मंडी से बाहर आते हैं, तभी एक समर्थक नारा उछालता है, ‘मोदी तो गुजरात रहेंगे, अजय राय साथ रहेंगे।’
गाड़ी में वापस आकर बैठते हैं। मंडी आने का मकसद बताते हैं कि यहां करीब 50 गांवों के लोग सब्जी लेकर आते हैं। एक जगह आकर 50 गांवों में पहुंच गया हूं। काफिला आगे बढ़ता है रानीबाजार की तरफ। तभी पता चलता है कि कुछ लोग जल गए हैं, प्रभा हास्पिटल में भर्ती हैं। गाड़ी हास्पिटल के पास रुकवा देते हैं, घायलों का हाल लेते हैं, परिजनों से किसी भी तरह की मदद के लिए फोन करने को कहते हैं। तीमारदार बाहर तक आता है, पर उसे वापस भेज देते हैं। गाड़ी छोड़ रानीबाजार में पैदल ही चल देते हैं। कइयों को नाम से पुकार कर साथ देने की बात करते हैं तो किसी से एक बार मौका देने का निवेदन। रानी बाजार में एक बुजुर्ग पंडित जी से मिलते हैं, अजय हाथ जोड़कर साथ देने का निवेदन करते हैं, पंडित जी भी सर पर हाथ रखकर आशीष देते हैं, इस बीच उनका बेटा घर से निकलता है, सिर पर मोदी टोपी लगाए हुए। जैसे ही सामने अजय राय को देखता है, टोपी बरमूडे (निकर) में खोंस लेता है और पास पहुंचकर कहता है, भइया नमस्ते, सब ठीक रहेगा। जब वह यह कह रहा होता है, अगल बगल वाले ही कनखियों से उसे देखकर मुस्कराते हैं।
इसके बाद वह राजातालाब दूध मंडी पहुंचते हैं। अभी 10 ही बजे थे, ज्यादा दूधिये आए नहीं थे। जितने हैं, उनसे हाथ मिलाकर रखौना गांव की तरफ काफिला मुड़ता है। मोड़ पर बरम बाबा का चबूतरा आ जाता है, जूते उतारकर अंदर जाते हैं, माथा टेकते हैं, उनके माथा टेकने पर बाहर खड़े लोग भी सिर नवा लेते हैं।
रखौना गांव के बाहर अमराई में 200-250 लोगों का हुजूम। महिलाओं की संख्या ज्यादा। प्रधान व पूर्व प्रधान दोनों मौजूद। अनपढ़, अनगढ़ पर घूंघट वाली कुछ महिलाओं को फूल माला दिलवाकर राय का स्वागत कराया जाता, सहज कम, प्रायोजित ज्यादा लगता है। थोड़ी औपचारिकताओं के बावजूद राय हुजूम को संबोधित करते हैं, खालिस भोजपुरी अंदाज में। कहते हैं कि, अगर ग्राम प्रधानी के चुनाव में रखौना गांव के बाहर का आदमी चुनाव लड़ने लगे तो क्या स्वीकार करेंगे? भीड़ से आवाज आती है नहीं। राय कहते हैं कि तो फिर गुजरात के आदमी को वोट क्यों? क्या मैं अहमदाबाद से चुनाव लड़ने जांऊ तो वहां के लोग मुझे स्वीकारेंगे? फिर शुरू होते हैं, घर से घाट तक का रिश्ता रखता हूं आप सबसे, क्या अपने बीच के आदमी को एक बार मौका नहीं देंगे।
सूरज चढ़ने लगता है फिर भी राह चलते लोगों से नमस्कार के लिए एसी कार का दरवाजा इतनी बार खुलता है कि बार बार पसीना पोछना पड़ता है। साढ़े 11 बजे काफिला भिखारीपुर गांव पहुंचता है। गांव के अंदर का चक्कर लगाने के लिए राय कार से उतरकर एक मोटरसाइकिल पर सवार हो जाते हैं। घूम-घूम कर एक जगह पर रूकते हैं। नीम के पेड़ के नीचे गांव के कुछ लोग गुड़ और कुंए के पानी से स्वागत करते हैं। राय भी गुड़ की एक डली मुंह में डालते हैं और एक लोटा पानी लेते हैं। वापस गाड़ी में लौटते हैं, बताते हैं कि मेरा अपना तरीका है। भाषण देने या नारा उछालने के बजाय मतदाताओं से सीधे संपर्क की कोशिश करता हूं। प्रचार को पर्सनल टच देने में विश्वास है।
सिलसिला रात साढ़े दस बजे तक चलता है। दोपहर में बनारस क्लब में लोगों से मिलते हैं तो शाम को अस्सी मोहल्ले में महिलाओं के कार्यक्रम में शामिल हुए। रात 10 बजे अतुलानंद स्कूल, शिवपुर में विधानसभा उत्तरी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। घर लौटे तो तमाम लोग इंतजार में बैठे थे।
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