कोर्स संबंधी किताबों की डिमांड कर रहे युवा

Varanasi Updated Sun, 24 Nov 2013 05:42 AM IST
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वाराणसी। टाउन हाल मैदान में लगे राष्ट्रीय पुस्तक मेला में दूसरे दिन शनिवार को युवाओं की खासी भीड़ रही। स्टालों पर उपलब्ध ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और कला के अलावा कोर्स संबंधी विभिन्न विषयों से जुड़ीं पुस्तकें युवाओं के आकर्षण का केंद्र बनी हैं। ज्यादातर युवा अपने कोर्स से जुड़ी किताबों की खरीदारी करते दिखे।
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पुस्तक मेले में लगे 74 स्टालों पर ज्ञान-विज्ञान, शिक्षा, चिकित्सा, व्यक्तित्व विकास, खेल, साहित्य आदि की पुस्तकों का अनूठा संग्रह है। इनमें विभिन्न प्रकाशनों की 20 से अधिक ऐसी स्टाल हैं, जिनमें कक्षा छह से स्नातक तक के पाठ्यक्रमों से संबंधित पुस्तकें मौजूद हैं। जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, पापुलर साइंस, भौतिक विज्ञान शब्द कोश, मैथ ओलंपियाड, साइंस एक्सपेरीमेंट, कंप्यूटर साइंस, मैनेजमेंट, होम साइंस, इंग्लिस ग्रामर और स्पोकेन, म्यूजिक, चित्रकला, रंगमंच और पर्यावरण समेत विभिन्न विषयों की पुस्तकें युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें, पत्रिकाएं और आडियो-वीडियो सीडी तथा पेन ड्राइव मौजूद हैं। विभिन्न लेखकों-कवियों की हिंदी तथा उर्दू साहित्य की किताबों की भी युवा खरीदारी करते दिखे। छात्र-छात्राओं ने प्रकाशकों से पुस्तकों के बारे में सवाल-जवाब कर अपनी जिज्ञासा भी शांत की। वहीं, दिल्ली समेत विभिन्न शहरों से आए प्रकाशकों का कहना था कि मांग के अनुरूप एक-दो दिन में और भी पुस्तकें मंगाई जाएंगी।
बोले युवा-
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पुस्तक मेले में बहुत सी ऐसी किताबें हैं, जो व्यक्तित्व निखारने के लिए अहम साबित हो सकती हैं। साथ ही विज्ञान, गणित, कंप्यूटर समेत विभिन्न विषयों की पुस्तकें छात्र-छात्राओं के लिए एक ही कैंपस में मौजूद हैं, जो अच्छी बात है। - वर्षा सिंह (छात्रा), हरिश्चंद्र पीजी कालेज
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महात्मा गांधी, मुंशी प्रेमचंद, हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिवंश राय बच्चन, काशीनाथ सिंह समेत कई प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं और आत्मकथाओं का संग्रह पुस्तक मेले का आकर्षण है। हालांकि ये पुस्तकें महंगी हैं। इस बारे में प्रकाशकों को विचार करना चाहिए। - अनामिका, डीएलडब्ल्यू
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महाभारत और भागवत कथा पर आधारित पुस्तकों के अलावा वेदों, वेदांग एवं संस्कृत साहित्य की किताबें भी पुस्तक मेले में आनी चाहिए। कंप्यूटर, विज्ञान, कॉमिक्स, खेल, रेसिपी और हिंदी-उर्दू साहित्य से जुड़ी किताबें यहां ज्यादा हैं। - विकास पांडेय, बुलानाला
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