डीएपी की बोरी में बेची जा रही एनपीके

Varanasi Updated Fri, 22 Nov 2013 05:42 AM IST
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सेवापुरी। डीएपी की बोरी में एनपीके खाद भरकर बेचने का मामला प्रकाश में आया है। आलू और सरसों की बुआई के लिए बाजार से डीएपी खरीदने वाले किसानों ने ठगे जाने के बाद इसका खुलासा किया। डीएपी की प्रति बोरी कीमत 1100 और एनपीके की प्रति बोरी 830 रुपये है। दोनों खाद रंग-रूप में एक जैसी होती है जिससे इसकी आसानी से पहचान कर पाना मुश्किल होता है। ऐसे में इस धंधे में लिप्त दुकानदार डीएपी की बोरी में एनपीके बेचकर प्रति बोरी 200 से 270 रुपये कमा रहे हैं।
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क्षेत्र के कुछ लाइसेंसी खाद विक्रेताओं का आरोप है कि बिना लाइसेंस के खाद की दुकान चलाने वाले डीएपी की बोरी खरीद कर उसमें एनपीके भरकर बेच रहे हैं। वे बाजार भाव से कम दाम कर खाद बेच रहे हैं जिससे उनके धंधे पर असर पड़ रहा हैं। वहीं किसान वंशराज दुबे, सुरेंद्र कुमार सिंह, रामअचल चौहान, विनोद सिंह, दयाशंकर दुबे का कहना है कि उन्हें ठगे जाने का पता तब चला जब आलू और सरसों की बुआई के समय बाजार से खरीदी गई डीएपी का इस्तेमाल करने पर उसका असर नहीं दिखा। यूपी कालेज के कृषि संकाय के रिटायर्ड अधिष्ठाता डा. तेगबहादुर सिंह का कहना है कि डीएपी में यूरिया और फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है जबकि एनपीके में कम। दोनों खादों का रंग-रूप एक जैसा होने से इसकी आसानी से पहचान करना मुश्किल है। एनपीके को डीएपी बताकर बेचने वाले किसानों के साथ धोखा कर रहे हैं।
कोट
जिले के किसी भी दुकानदार के खिलाफ डीएपी की बोरी में एनपीके भरकर बेचने की शिकायत मिली तो उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी। संजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी।
कोट
डीएपी की बोरी में एनपीके बेचने की शिकायत मिली है। किसान ऐसे दुकानदार के बहकावे में न आएं। साधन सहकारी समितियों पर पर्याप्त डीएपी है। वे समितियों से ही खाद लें। सुरेंद्र कुमार सिंह, डायरेक्टर, जिला सहकारी फेडरेशन।
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