तुसाद म्यूजियम जैसे मोम के पुतले

Varanasi Updated Fri, 22 Nov 2013 05:42 AM IST
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नई दिल्ली /वाराणसी । लंदन के तुसाद म्यूजियम में सेलिब्रेटी के लगे मोम के पुतलों की तरह अपना या अपने किसी परिचित का पुतला तैयार कराने के लिए लंदन जाने की जरूरत नहीं। भारत में ही न पिघलने वाले मोम के पुतले बनाए जा सकते हैं। यह मोम जितने पुराने होते जाएंगे उतने ही चमकदार होते जाएंगे। इतना ही नहीं विभिन्न आकृतियों में बनवाकर इन्हें संगमरमर के सजावटी सामान के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
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व्यापार मेले के हॉल नंबर-14 (ओपन एरिया) में लगे पवेलियन में इनोवेशन आइटम दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। इस वर्ष मेले में खास तौर पर इनोवेशन पवेलियन बनाया गया है। यहां भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (आईआईटी-बीएचयू) सहित देश के कई विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपनी सोच और खोज को मूर्त रूप देकर प्रदर्शित किया है।
आईआईटी-बीएचयू के साथ मिलकर कृतिका पॉली कारपोरेशन ने न पिघलने वाली मोम को डिजाइन किया है। जिसे यहां विभिन्न आकृतियों में प्रदर्शित किया गया है। कंपनी से जुड़े प्रत्युश उपाध्याय ने दावा किया कि तुसाद म्यूजियम में लगाए गए पुतलों के लिए तापमान को सेट किया गया है जबकि उनके मोम से तैयार पुतले किसी भी तापमान में नहीं पिघलते हैं। बीएचयू आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने बताया कि अलग तरह के मोम बनाने के लिए डेढ़ साल पूर्व रिसर्च किया गया था। शोधकर्ताआें ने ऐसा मोम बनाया जो पिघल नहीं सकता है। उन्हाेंने बताया कि इससे आकर्षक मूर्तियां बनाई जा सकती है। उन्हाेंने बताया कि मोम बनाने की तकनीक आईआईटी के वैज्ञानिकाें ने विकसित किया था लेकिन अब यह जिम्मेदारी कृतिका पाली कारपोरेशन को सौंप दी गई है।
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मोबाइल से चलाएं और बंद करें उपकरण
दुनिया के किसी कोने से भी मोबाइल के जरिए अपने बिजली के उपकरणों को चालू या बंद किया जा सकता है। नोएडा की कंपनी मेसर्स सुमोना ऑटोमेशन ने सीआईएच (कंट्रोल इन हैंड) सिस्टम विकसित किया है। यह एसएमएस निगरानी एवं नियंत्रण प्रणाली है। इसके जरिए गीजर, एसी, पंप, जेनरेटर सेट और अन्य बिजली के उपकरणों को कहीं से भी मोबाइल के जरिए चलाया या बंद किया जा सकता है। आईटीपीओ की (जनसंपर्क) प्रबंध निदेशक वी. मीरा ने बताया कि युवाओं के पास बहुत विचार हैं लेकिन उनको मंच नहीं मिल पाता। मेले में उन्हें एक मंच दिया गया है।
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