काशी में साहित्य, संस्कृति और संगीत का अकूत भंडार : मीरा कुमार

Varanasi Updated Fri, 25 Oct 2013 05:40 AM IST
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वाराणसी। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा है कि काशी में साहित्य, संस्कृति और संगीत का अथाह भंडार है। यहां की गंगा-जमुनी तहजीब इस शहर को दुनिया भर में अलग पहचान देती है। कला, नृत्य, साहित्य, दर्शन, मीमांसा, अनुशीलन और अध्ययन शहर की समृद्ध विरासत का गवाह है। यहां शिव और गंगा एक-दूसरे के पर्याय हैं। इस शहर को जानने की दुनिया भर के लोगों में जिज्ञासा है। मुझे भी ईर्ष्या होती है क्योंकि मैं इस शहर की वास्तविक बेटी नहीं हूं। गोद ली हुई बेटी हूं।
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वे यहां काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययन पीठ सभागार में ‘बनारस उत्सव’ के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहीं थीं। उन्हाेंने कहा कि देश को अब बड़े बदलाव की जरूरत है। समाज में यह बदलाव पुनर्जागरण से आएगा। हमें किसी की नकल नहीं करनी है। देश को अपने ढंग से पुनर्जागृत करना होगा। गंगा में प्रदूषण का जिक्र करते हुए मीरा कुमार ने कहा कि गंगा में पहले जैसी आभा व कांति नहीं है। निर्मलता और अविरलता भी प्रभावित हो रही है। गंगा को लेकर मेरे मन में पीड़ा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के दूसरे देशों से वाराणसी का कारोबारी रिश्ता सदियों पुराना है। शिव की चर्चा करते हुए कहा कि शिव तो नटराज हैं। यही वजह है कि काशी के मंदिरों में संगीत की पूजा होती रही है। बनारस के संगीत में सम्मोहन है। भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां और गिरिजा देवी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ठुमरी, दादरा, चैती, कजरी, होरी बनारस के संगीत की विरासत को समृद्ध करते हैं। काशी को सामाजिक क्रांति का केंद्र बताते हुए मीरा कुमार ने कहा कि 600 साल पहले काशी से ही संत रविदास ने मानवाधिकार की बात कही थी। वह एक ऐसे समाज के पक्षधर थे जिसमें सभी को समान भाव से देखा जाए। उन्होंने कबीर और रविदास को श्रमजीवी संत बताया और कहा कि कबीर हिंदुस्तानी संस्कृति के प्रतीक हैं। दोनों संतों ने श्रम की गरिमा बढ़ाने का काम किया। बनारस के शिल्पकारों और बुनकरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शिल्पकारी में भारत दुनिया में मशहूर है मगर बुनकरों के हालात आज अच्छे नहीं। बुनकर का बेटा रिक्शा चला रहा या मनरेगा मजदूर बन गया। भारत में औद्योगिक क्रांति न होने से ऐसे हालात उत्पन्न हुए हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे काशी विद्यापीठ के कुलपति डा. पृथ्वीश नाग ने कहा कि भूगोल के लिहाज से बनारस की लोकेशन यूनीक है। इतिहास और भूगोल बताता है कि यह शहर राजघाट से अस्सी की ओर बढ़ा है और बसा है। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि संप्रदाय के लोग आए और बस गए। समृद्ध पारंपरिक विरासत के चलते ही बनारस दुनिया के सबसे प्राचीन जीवित शहरों में शुमार है। महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि काशी में लघु भारत बसता है। यहां की संस्कृति और रहन-सहन दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। प्रारंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर बनारस उत्सव का उद्घाटन किया। आगतों का स्वागत आयोजन समिति के अध्यक्ष अशोक कपूर ने किया। अशोक गुप्ता ने उत्सव के बारे में जानकारी दी। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम समिति के अध्यक्ष दीपक मधोक और संचालन धर्मेंद्र सिंह ने किया।
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