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15 वर्षों में दो तिहाई बाग-बगीचे गुम

Varanasi Bureau Updated Mon, 05 Jun 2017 10:11 PM IST
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बलिया। बिगड़ते पर्यावरण का असर आम लोगों पर पड़ रहा है लेकिन इसे रोकने के लिए माकूल इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। दिनों-दिन बाग-बगीचों का रकबा घटता जा रहा है और तमाम प्रयासों के बावजूद इसको लेकर लोग संवेदनशील नहीं हैं।
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जनपद कुल दो लाख 99 हजार 265 हेक्टेयर में फैला हुआ है। ऐसे तो जनपद में कोई वन क्षेत्र घोषित नहीं है लेकिन व्यक्ति भूमि पर लगाए गए बाग-बगीचे भी दिनों-दिन तेजी से घटते जा रहे हैं। राजस्व विभाग के आंकड़ों को देखे तों करीब 15 साल पहले जिले में 17 हजार हेक्टेयर में बाग-बगीचे थे लेकिन साल-दर-साल पेड़ों के अंधाधुंध कटाई के चलते करीब साढ़े पांच हजार हेक्टेयर में आकर सिमट गया है। एक ओर पर्यावरण बचाने के लिए विभिन्न विभागों की ओर से तमाम प्रयास किए जाते हैं वही दूसरी ओर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने के कोई उपाय नहीं किए जाते हैं। हालांकि शासन की ओर से पेड़ों की कटाई को प्रतिबंधित किया गया है और बगैर वन विभाग की अनुमति के पेड़ नहीं काटे जा सकते हैं। लेकिन शायद ही कभी इसका पालन किया जाता हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में कुछ साल पहले तक घने बगीचे देखने को मिलते थे वहां अब या तो खेती की जाती है या फिर मकान आदि बन गए हैं। विकास के नाम पर भी बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की जाती है लेकिन इसके एवज में पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने को पेड़ लगाने का काम नहीं किया जाता है। पर्यावरण को बचाने के लिए हर साल वन विभाग की ओर से लाखों की तादाद में पेड़ लगाए जाते हैं लेकिन इसकी सुरक्षा आदि के इंतजाम नहीं होने के कारण यह नष्ट हो जाते हैं और पर्यावरण बचाने की कवायद पूरी तरह फेल हो जाती है।
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बड़े पैमाने पर होती है पेड़ों की कटाई
बलिया। पर्यावरण को संतुलित करने के लिए पेड़ों को बचाना सबसे अधिक जरुरी है। लेकिन पिछले 15 सालों से पेड़ों के काटने की रफ्तार काफी तेज रही। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 साल पहले जहां कुल 17 हजार हेक्टेयर में बाग-बगीचे थे वहीं आज महज साढ़े पांच हजार हेक्टेयर में ही बाग-बगीचे बचे हैं। बताया जाता है कि जिले में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई की जाती है और इसे रोकने को लेकर वन विभाग व पुलिस महकमा कभी गंभीर नहीं रहता है। इनसेट...
हर साल लगने वाले पौधों को बचाने की कवायद नहीं
बलिया। जिले में वन विभाग की ओर से हर साल लाखों पेड़ लगाए जाते हैं इस पर हर साल लाखों का खर्च भी होता है। बीते एक दशक से हर साल औसत एक लाख पौधे लगाए जा रहे हैं। वर्ष 2016 में तो शासन की ओर से चलाए गए अभियान के तहत जिले में वन विभाग समेत अन्य विभागों की ओर से कुल आठ लाख पौधे लगाए गए। लेकिन पौधरोपण के बाद इन्हें सुरक्षित रखने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए। आलम यह रहा कि अधिकांश पौधे या तो सूख गए या फिर मवेशियों ने इसे समाप्त कर दिया।
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नहीं दिखता नरहीं के महदनवा का जंगल
बलिया। एनएच 31 पर स्थित नरहीं गांव के मौजा महदनवा में किसानों की जमीन पर घना बागीचा था। करीब 15 साल पहले तक सड़क से गुजरने वाले लोगों की निगाह अनायास ही इस घनघोर बगीचे की ओर चला जाता था। ग्रामीणों की मानें तो गर्मी के दिनों में तेज धूप होने के बावजूद इस बगीचे में अंधेरा रहता था। इसके अलावा इस बगीचे में मोर की संख्या भी काफी अधिक थी जिसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते थे। लेकिन आज 15 साल बाद महदनवा में जहां-तहां ही पेड़ दिखते हैं।

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