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अंबेडकर स्कूलों में 46 अध्यापकों की फर्जी नियुक्ति

Updated Mon, 05 Jun 2017 01:03 AM IST
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अंबेडकर स्कूलों में 46 अध्यापकों की फर्जी नियुुक्ति
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मऊ। समाज कल्याण विभाग द्घारा जिले में संचालित अंबेडकर प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति में नियम को धता बताकर 46 अध्यापकों की नियुक्ति की गई। इन अध्यापकों की नियुक्ति सात से आठ वर्ष पूर्व की तिथियों में की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी के फर्जी अनुमोदन से पीछे की तिथियों में नियुक्तियां दर्शाकर समाज कल्याण निदेशालय से अनुमोदन ले लिया गया है। इसे खेल में विभाग के कई अधिकारी शामिल हैं। इन नियुक्त अध्यापकों को पिछले वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों का वेतन भुगतान भी निदेशालय को भ्रम में रखकर कर दिया गया है। एक पूर्व अधिकारी की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय से इस मामले की जांच करने का आदेश दिया गया है।
इस खेल में समाज कल्याण विभाग के साथ शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भी संलिप्तता है। बताते चले शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2011 में टीईटी योग्यता अनिवार्य की गई। इस दौरान खेलकर इस शासनादेश के जारी होने से पूर्व की तिथियों में जिले के अलग अलग विद्यालयों में 46 अध्यापकों की नियुक्तियां की गई। सबसे बड़ा खेल तो यह है कि नियुक्तियों में हस्ताक्षर उन समाज कल्याण अधिकारियों का किया गया है, जो या तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं या फिर दिवंगत। शिकायतकर्ता ने बताया कि सात वर्ष पूर्व की इन नियुक्तियों का अनुमोदन भी फर्जी है। क्योंकि डिस्पैच रजिस्टरों में इनका उल्लेख नहीं है। यही हाल समाज कल्याण अधिकारियों के अनुमोदन के मामले में भी है। इनके अनुमोदन के बाबत पत्राचार का कोई समुचित साक्ष्य कार्यालय में मौजूद नहीं है। ये नियुक्तियां सितंबर अक्टूबर से लेकर नवंबर 2017 के बीच हुई, लेकिन उन पर तिथियां 2010 और 2011 की अंकित की गईं। इतना ही नहीं इन अध्यापकों को वेतन देने के लिए भी भ्रामक तरीका अपनाया गया। गोलमाल करने वालों ने समाज कल्याण निदेशक को पत्र लिखा इसमें कहा गया कि विभाग के पास बजट है, यदि आपकी सहमति हो तो इससे अध्यापकों के बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाय।

इस भ्रामक पत्र का सहारा लेकर बीते माह सभी अध्यापकों को दिसंबर 2016 से लेकर मार्च 2017 तक के वेतन का भुगतान भी कर दिया। विभागीय सूत्रों की मानें तो जारी हुए वेतन से 40 प्रतिशत कमीशन लिया गया। जिले में हुए इस गोलमाल की शिकायत सेवानिवृत्त एडीडीओ एसएन सिंह ने मुख्यमंत्री से किया। इसमें पूरे मामले की जांच कराने का निवेदन किया। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस मामले की जांच करने का आदेश भी आ चुका है और जांच भी शुरू कर दी गई हैं। उधर, जांच की आंच में कही फंस न जाए इस लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी जितेंद्र मोहन शुक्ल ने शासन में निवेदन कर अपना स्थानांतरण दूसरे जिले में करा लिया। निदेशालय ने उनके स्वयं के अनुरोध पर उनका ट्रांसफर गाजीपुर के लिए कर दिया है।

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