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उत्तर प्रदेश चुनाव: अखिलेश-शिवपाल गठबंधन में अभी हैं कई पेंच, कैसे होगा नेताओं का एडजस्टमेंट?

Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Fri, 17 Dec 2021 07:45 PM IST

सार

राजनीतिक विश्लेषक और चुनावी सर्वे करने वाली एक प्रमुख एजेंसी से जुड़े सुधीर मल्होत्रा कहते हैं कि निश्चित तौर पर शिवपाल यादव की पार्टी को इस गठबंधन से शुरुआती दौर में फायदा मिलता हुआ दिख रहा है। हालांकि वे यह बात मानते हैं कि सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले से ही शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का राजनैतिक गठबंधन और राजनीतिक भविष्य भी तय होगा...
अखिलेश यादव और शिवपाल यादव
अखिलेश यादव और शिवपाल यादव - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
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विस्तार

समाजवादी पार्टी और शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का आगामी विधानसभा के लिए चुनावी गठबंधन हो गया है। राजनीतिक गलियारों में अब गुणा-भाग यही लग रहा है कि इस गठबंधन से आखिर सबसे ज्यादा किसे फायदा होने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस गठबंधन से यादव वोटों की सपा और प्रसपा के लिए गोलबंदी तो होगी साथ में शिवपाल यादव की राजनीतिक पार्टी को पुनर्जीवन मिल सकता है। हालांकि इस गठबंधन में अभी सबसे बड़ा पेंच सीटों के बंटवारे को लेकर फंसा हुआ है। जब तक सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला तय नहीं हो जाता, तब तक यह कह पाना मुश्किल होगा कि राजनीतिक गठबंधन का भविष्य क्या होगा।

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शिवपाल की सौ सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना

समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठबंधन तो हो गया लेकिन इस पूरे गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच विधानसभा सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले पर फंसा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक शिवपाल यादव शुरुआती दौर से तकरीबन सौ सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। जबकि गठबंधन में समाजवादी पार्टी की ओर से इतनी सीटें मिलना शिवपाल यादव की पार्टी के लिए नामुमकिन सा लगता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा। क्योंकि जब शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी तो समाजवादी पार्टी के कई कद्दावर नेता शिवपाल यादव के साथ जुड़ गए थे। अभी भी समाजवादी पार्टी के कई पूर्व नेता शिवपाल यादव के साथ जुड़े हुए हैं। जो शिवपाल यादव की पार्टी से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। अब इन नेताओं को एडजस्ट करना सबसे बड़ी चुनौती भी होगा।

फायदा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव परिवार में पड़ी दरार पर हमेशा से लोगों का ध्यान लगा रहता है। हमेशा यही चर्चा होती थी कि क्या अखिलेश यादव और शिवपाल यादव फिर कभी एक होंगे या उनकी राजनीतिक पार्टियां आपस में गठबंधन करेंगी या नहीं। लेकिन अब जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन करके मैदान में उतरने की तैयारी की है तो इसके राजनीतिक मायने तलाशे जाने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के इस कदम से शुरुआती दौर में फायदा प्रगतिशील समाजवादी पार्टी को होता दिख रहा है। क्योंकि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का पुनर्जीवन मिलेगा।

प्रसपा के साथ गठबंधन बेहतर विकल्प

राजनीति पर कई दशकों से नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक और देश की एक प्रमुख चुनावी सर्वे करने वाली संस्था से जुड़े सुधीर मल्होत्रा कहते हैं कि 2019 में लोकसभा चुनावों में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने लड़े हुए चुनावों का आकलन कर लिया था। ऐसे में इस विधानसभा चुनावों में शिवपाल यादव को अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक करार करने से बेहतर विकल्प और कोई नहीं हो सकता था। अब इस राजनीतिक करार से प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव जीतने की संभावनाएं बन सकती हैं। संभव है शिवपाल यादव के बेटे समेत कुछ अन्य प्रसपा के बड़े नेताओं को टिकट मिले तो वह जीत भी सकते हैं। इसके अलावा इस गठबंधन से सपा के उन छिटके हुए नेताओं को भी ताकत मिलेगी जो मुलायम सिंह यादव के बाद शिवपाल यादव में संगठन को मजबूत करने के लिहाज से भरोसा जताते थे। सुधीर कहते हैं इसका लाभ समाजवादी पार्टी को और प्रसपा को मिल सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस गठबंधन से समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव यह संदेश देने में भी कामयाब होंगे कि परिवार में कोई बंटवारा नहीं है। शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के गठबंधन से यादव वोटर गोलबंद होगा और इसका फायदा दोनों पार्टियों को मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषक और चुनावी सर्वे करने वाली एक प्रमुख एजेंसी से जुड़े सुधीर मल्होत्रा कहते हैं कि निश्चित तौर पर शिवपाल यादव की पार्टी को इस गठबंधन से शुरुआती दौर में फायदा मिलता हुआ दिख रहा है। हालांकि यह बात मानते हैं कि सीटों के बंटवारे के फॉर्मूले से ही शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का राजनैतिक गठबंधन और राजनीतिक भविष्य भी तय होगा।  


सपा के कामों का फीता काट रही भाजपा

सपा के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में उनकी पार्टी राजनीतिक पार्टियों से गठबंधन करके आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव नीतिगत फैसलों के साथ न सिर्फ आगे बढ़ रहे हैं बल्कि उनके हर फैसले से एक सकारात्मक संदेश जनता के बीच जा रहा है। चौधरी का कहना है कि भाजपा ने कोई विकास ही नहीं किया। वे कहते हैं कि जो काम समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुए थे उसी को भाजपा अपना बताकर फीता काट रही है। मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के मुताबिक इस बार विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी की विचारधारा में आस्था रखने वाली उन सभी पार्टियों को अपने साथ लेकर चल रहे हैं और 2022 में उनकी सरकार बनने वाली है।

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